जानिए ओलंपिक के बारे में दिलचस्प बातें



वेब ख़बरिस्तान। खेल का महाकुंभ कहे जाने वाले इस टूर्नामेंट को कोरोना के चलते 2020 में स्थगित करना पड़ा था, लेकिन इस साल कोरोना की स्थिति में सुधार के चलते इसे इस साल करवाया जा रहा है।

कहां देख सकते हैं लाइव

कोरोना के चलते दर्शकों को मैदान में आने की अनुमति नहीं होगी। टूर्नामेंट में कुल मिलाकर 33 खेलों में लगभग 206 देश हिस्सा लेने वाले हैं। टोक्यो ओलंपिक का लाइव टेलिकास्ट आप सोनी नेटवर्क पर 23 जुलाई शाम 4:30 बजे से देख सकेंगे।


अब जानते हैं ओलंपिक के पांच मुख्य स्तम्भों का अर्थ

दुनिया में खेलों का सबसे बड़ा मंच ओलंपिक खेलों को माना जाता है। दुनियाभर के सारे ही देश इसमें हिस्सा लेते हैं और अपने देश का अलग-अलग खेलों में प्रतिनिधित्व करते हैं। हर 4 साल में ओलंपिक खेल होते हैं। ओलंपिक के 5 मुख्य स्तंभों का अलग-अलग अर्थ होता है।


क्या है ओलंपिक के पांच रिंग का महत्व

ओलंपिक खेलों में जो 5 रिंग होते हैं यह ओलंपिक खेलों के चिन्ह होते हैं। यह पांच रिंग दुनिया के पांच मुख्य महाद्वीपों को दर्शाते हैं। एशिया, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया या ओसिनिया, यूरोप और अफ्रीका यह पांच मुख्य महाद्वीप हैं। ओलंपिक के इन पांच रिंग को 1912 में पियरे डी कुबर्तिन ने बनाया था।



ओलंपिक रिंग में रंग को महत्व

ओलंपिक रिंग्स में नीला रंग यूरोप के लिए, पीला रंग एशिया के लिए, काला रंग अफ्रीका के लिए, हरा रंग ऑस्ट्रेलिया या ओशिनिया के लिए और लाल रंग अमेरिका के लिए दर्शाया जाता है। अफ्रीका के लिए काला इसलिए होता है क्योंकि वह पिछड़ा और गरीब है।


ओलंपिक ध्वज

पियरे डी कुबर्तिन ने ही ओलंपिक ध्वज को भी बनाया था। सफेद रंग इस ध्वज को दिया गया है क्योंकि यह ध्वज सिल्क का बनाना होता है और इस पर ओलंपिक के चिन्ह पांच रिंग बनाए गए हैं।


ओलंपिक मैस्कॉट

ओलंपिक खेलों का आयोजन जिस शहर ने किया होता है वही शुभंकर का चयन भी करता है। ओलंपिक खेलों की जो थीम होती है वह शुभंकर ही बताता है। जब रिओ ओलंपिक ब्राजील में हुए थे तब शुभंकर का नाम विनिसियस था। इस साल खेलों का शुभंकर नाम मिराइटोवा और सोमेती है।


ओलंपिक खेलों की मशाल

पुराने समय में जब खेल शुरू होना होता था और सूर्य नहीं उगता था तो उससे पहले यूनान के ओलंपिया गांव से मशाल को जलाया जाता था। बता दें कि 1928 में ओलंपिक खेलों में ओलंपिक मशाल जलाने की पंरपरा शुरू हुई थी।

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