कश्मीर में खोया टूरिस्ट का 5 लाख का गोल्ड ब्रेसलेट, घोड़े वाले ने 90 किमी दूर श्रीनगर जाकर लौटाया

रफी और अफरोज 5 लाख रुपये का ब्रेसलेट लेकर श्रीनगर पहुंचे

रफी और अफरोज 5 लाख रुपये का ब्रेसलेट लेकर श्रीनगर पहुंचे



घनश्याम भाई अपने परिवार के साथ कश्मीर घुमने गए थे

वेब ख़बरिस्तान,कश्मीर। सूरत के रहने वाले घनश्याम भाई अपने परिवार के साथ कश्मीर घुमने गए थे। पहलगाम में घूमते हुए उनका 5 लाख का सोने का ब्रेसलेट कहीं गिर गया। घूमते हुए जब वो श्रीनगर पहुंचे तब जाकर उन्हें ऐहसास हुआ कि उनका बेशकीमती ब्रेसलेट कहीं गिर गया है। ये पता लगते ही उनके होश उड़ गए। पूरे परिवार ने अपने बैग चेक किए मगर ब्रेसलेट कहीं नहीं मिला। तब उन्हें यकीन हो गया कि पहलगाम में घूमते हुए ही ब्रेसलेट कहीं गिर गया। तब उनके मन में यही आया कि 5 लाख का गहना अगर किसी को मिलेगा तो छोड़ेगा नहीं। मगर लेकिन पहलगाम के घोड़े वाले अफरोज अहमद ने ईमानदारी की मिसाल पेश की।

ब्रेसलेट के लिए हुई टेंशन

घनश्याम ने अपने टूरिस्ट ऑपरेटर को पहलगाम में फोन किया और बताया कि उनका बेशकीमती ब्रेसलेट वहां कहीं गिर गया है। इसके बाद ऑपरेटर ने तुरंत घोड़े चलाने वालों के एसोसिएशन प्रेसिडेंट मोहम्मद रफी से पूछा कि क्या किसी घोड़े वाले को रास्ते में कोई ब्रेसलेट मिला?’


घोड़े पर घुमाने वाले अफरोज अहमद मीर बताते हैं- जब हम काम से लौट रहे थे तो हमें एक चमकता हुआ ब्रेसलेट दिखा। मैंने अपने दोस्तों और एसोसिएशन के प्रेसिडेंट को इसके बारे में बताया। लेकिन हमें नहीं पता था कि ये किसका है।

ब्रेसलेट की फोटो भेजी

मोहम्मद रफी ने बताया कि गुजरात के सूरत के रहने वाले टूरिस्ट का कुछ देर में फोन आया कि उनका एक सोने का ब्रेसलेट खो गया था। मगर हम वेरिफाई करना चाहते थे कि क्या ये वही ब्रेसलेट है, जिसके बारे में वो पूछ रहे हैं। इसके बाद उन्होंने व्हाट्सएप पर ब्रेसलेट की फोटो भेजी और हमें जो ब्रेसलेट मिला था, फोटो उससे मैच कर रहा था।

इसके बाद 9 बजे अफरोज और मोहम्मद ज्वेलरी वापस करने के लिए पहलगाम से निकल पड़े। 90 किलोमीटर का सफर तय करके दोनों श्रीनगर पहुंचे।

ईमानदारी से नहीं चलेंगे तो धोखा ही मिलेगा

रफी और अफरोज 5 लाख रुपये का ब्रेसलेट लेकर जब श्रीनगर पहुंचे तो घनश्याम भाई और बाकी परिवार का उदास चेहरा मुस्कान से खिल गया। घोड़ा चलाने वाले अफरोज और मोहम्मद भाई कहते हैं कि हमारा सिद्धांत है कि अगर हम टूरिस्ट से ईमानदारी बरतेंगे तो ही हमारा काम आबाद होगा। अगर ईमानदारी से नहीं चलेंगे तो धोखा ही मिलेगा।

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