Draupadi Murmu : एक शिक्षक से राष्ट्रपति कैंडिडेट बनने तक का सफ़र



64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू भारत की राष्ट्रपति बनने वाली पहली आदिवासी महिला बन सकती हैं  

खबरिस्तान नेटवर्क: आने वाला महीना जब देश को मिलेगा एक नया राष्ट्रपति। जी हाँ जुलाई महीने की 25 तारीक को नये राष्ट्रपति का नाम सबके सामने आ जायेगा। इसके लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है और 29 जून को पर्चा भरने की आखिरी तारीख तय की गयी है। इस बीच NDA ने झारखंड की राज्यपाल रह चुकीं द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बना कर सबके सामने पेश किया है।

आखिर कौन है ये द्रौपदी मुर्मू

द्रौपदी मुर्मू जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक बन कर की थी। उसके बाद तो उन के नाम के आगे कई बड़े पद जुड़ते चले गये। तो चलिए आपको उनके बारे में बताते हैं कि कैसे वे एक शिक्षक, पार्षद, विधायक, राज्यपाल का सफ़र तय करते हुए राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार तक पहुंची। साथ ये भी जानेगे कि उनकी अब तक की राजनीतिक यात्रा कैसी रही है? राजनीति में आने से पहले द्रौपदी मुर्मू क्‍या करती थीं? बता दें द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून 1958(अट्ठावन) को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू है। वह एक आदिवासी जातीय समूह संथाल परिवार से ताल्लुक रखती हैं। पति और दो बेटों को खोने के बाद भी उन्‍होंने हिम्‍मत नहीं हारी और लगातार आगे बढ़ती रहीं।

राजनीति में आने से पहले कहां थी

द्रोपदी मुर्मू के जीवन मे कई उतार-चढ़ाव आये। उन्होंने राजनीति में आने से पहले श्री अरविंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च (रायरंगपुर) में मानद सहायक शिक्षिका के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा वह सिंचाई विभाग में कनिष्ठ सहायक के रूप में भी अपना योगदान दे चुकी हैं।

राजनीति में आने की शुरुआत


उन्होंने साल 1997(सत्तानबे) में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। उसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे  मुड़कर नहीं देखा। द्रौपदी मुर्मू 1997 में ओडिशा के राजरंगपुर जिले में पार्षद बनी थी। साल 1997 में ही मुर्मू बीजेपी की ओडिशा ईकाई की अनुसूचित जनजाति मोर्चा की उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं। साल 2002 से 2009 तक और फिर वर्ष 2013 में मयूरभंज के भाजपा जिलाध्यक्ष के रूप में भी उन्होंने अपना योगदान दिया है।

राजनीति में किन किन पदों पर रह चुकी हैं

ओडिशा के आदिवासी परिवार में जन्मीं द्रौपदी मुर्मू झारखंड की नौवीं राज्यपाल बनी थीं। इतना ही नहीं वे ओडिशा के रायरंगपुर से विधायक रह चुकी हैं। वह पहली ओडिया नेता हैं जिन्हें राज्यपाल बनाया गया। इससे पहले BJP-BJD गठबंधन सरकार में साल 2002 से 2004 तक वह मंत्री भी रह चुकी हैं। बता दें कि अनुसूचित जनजाति समुदाय से आने वाली मुर्मू राज्यपाल बनने से पहले भारतीय जनता पार्टी की सदस्य भी रह चुकी हैं। यही नहीं द्रौपदी मुर्मू साल 2000 में गठन के बाद से पांच साल का कार्यकाल (2015-2021) पूरा करने वाली झारखंड की पहली राज्यपाल हैं। उड़ीसा में भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल गठबंधन सरकार के दौरान, वह 6 मार्च, 2000 से 6 अगस्त, 2002 तक वाणिज्य एवं परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहीं। इसके अलावा 6 अगस्त, 2002 से 16 मई 2004 तक मत्स्य पालन एवं पशु संसाधन विकास राज्य मंत्री भी रही।

अब बनी राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार

आने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) पार्टी ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया है। वह देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली आदिवासी नेत्री बन चुकी हैं। मंगलवार को भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने कहा कि पहली बार किसी महिला आदिवासी प्रत्याशी को वरीयता दी गई है।

द्रोपदी मुर्मू के बारे में खास बातें

बता दें कि द्रौपदी सिंचाई और बिजली विभाग में 1979(उनासी) से 1983(तिरासी) तक जूनियर असिस्‍टेंट के तौर पर काम कर चुकी हैं। साल 2007 में द्रौपदी को ओडिशा विधानसभा के बेस्‍ट एमएलए ऑफ द ईयर पुरस्‍कार सम्मान भी मिल चूका है।

अब अगर द्रौपदी मुर्म राष्‍ट्रपति पद का चुनाव जीतती है (एनडीए के संख्‍या बल को देखते हुए जिसकी पूरी संभावना है) तो वे देश की पहली आदिवासी महिला राष्‍ट्रपति होंगी।

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