उद्योग निदेशक IAS राकेश कुमार प्रजापति होंगे अब खनन विंग के बॉस

राज्य भू-विज्ञानी की पूरी शक्तियां उद्योग विभाग के निदेशक राकेश कुमार प्रजापति को दे दी

राज्य भू-विज्ञानी की पूरी शक्तियां उद्योग विभाग के निदेशक राकेश कुमार प्रजापति को दे दी



अवैध खनन पर कसेगा शिकंजा : सरकार ने भू-विज्ञानी की पूरी शक्तियां निदेशक को दीं

ख़बरिस्तान नेटवर्क, धर्मशाला

हिमाचल सरकार ने राज्य भू-विज्ञानी की पूरी शक्तियां उद्योग विभाग के निदेशक राकेश कुमार प्रजापति को दे दी हैं। 2012 बैच के युवा आईएएस राकेश प्रजापति की गिनती हिमाचल के टॉप परफॉर्मिंग  अफसरों में होती है। उन्होंने घाटे में चल रहे सामान्य उद्योग विकास निगम को लाभ में लाया है। प्रजापति अपनी टीम के साथ फील्ड में लगातार सक्रिय रहकर प्रदेश में अधिक से अधिक निवेश लाने पर काम कर रहे हैं। साथ ही उद्योगपति वर्ग की हर समस्या के समाधान को प्रयासरत रहते हैं। यही कारण है कि वे उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर की गुड बुक में शामिल हैं। डीसी कांगड़ा के अपने कार्यकाल में उन्होंने पूरे परिवार के संक्रमित होने के बाद भी अपनी ड्यूटी पूरी शिद्दत से निभाकर कोरोना संक्रमण से निपटने में अहम भूमिका निभाई थी जिसे लेकर लोग प्रजापति को आज भी याद करते हैं। 

4 जोन में बांटा प्रदेश, खनन विंग अब उद्योग विभाग का हिस्सा बना

सरकार ने अवैध खनन पर और लगाम कसने व वैध खनन गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए प्रदेश को चार जोन में विभाजित किया गया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव आरडी धीमान ने उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह की स्वीकृति के बाद इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी की है। इसके अनुसार अब खनन विंग अपने स्तर पर कोई निर्णय नहीं ले पाएगा। खनन संबंधी सभी तरह के निर्णय निदेशक की ओर से लिए जाएंगे। खनन विंग उद्योग विभाग का हिस्सा रहेगा।

हिमाचल प्रदेश माइनर मिनरल, कंसेशन प्रीवेंशन आफ इलिगल माइनिंग, ट्रांसपोर्टेशन एंड स्टोरेज रूल्ज- 2015 के तहत नई व्यवस्था लागू हुई है। नोटिफिकेशन के अनुसार राज्य भू-विज्ञानी अदालत से जुड़े मामलों को देखेंगे। चारों जोन के अधीन अधिकारियों व कर्मचारियों की तैनाती अतिरिक्त निदेशक और संयुक्त निदेशक करेंगे, लेकिन इसके लिए निदेशक की स्वीकृति लेनी होगी।

ऐसे होगा जिम्मेदारियों का बंटवारा


- खनन विंग के अधिकारियों व कर्मचारियों से क्या काम लेना है, इसे निदेशक देखेंगे। 

 -वन संरक्षण अधिनियम से जुड़े मामलों के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय होती रहेंगी।

- खनन से राजस्व बढ़ाने की जिम्मेदारी चारों जोन में तैनात किए खनन अधिकारियों, भू-विज्ञानियों पर रहेगी।

 - जियो तकनीकी अध्ययन, सड़कों की अलाइंमेंट, जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े तकनीकी मामलों की मंजूरी भू-विज्ञानी देंगे। 

 - क्रशरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जोन में नियुक्त अधिकारी जिम्मेदार होंगे। उनकी सिफारिश पर ही क्रशरों से जुड़ी स्वीकृतियां दी जाएंगी।

यह होंगे 4 जोन व उनके प्रभारी

जोन एक : राज्य भू-विज्ञानी पुनीत कुमार गुलेरिया के साथ सहायक भू-विज्ञानी सुनील वर्मा चंबा, किन्नौर व शिमला जिलों को देखेंगे। अधिकारियों के पास मुख्य खनिज और सीमेंट उद्योगों की जिम्मेदारी भी रहेगी।

जोन दो: भू-विज्ञानी संजीव कुमार शर्मा व अतुल शर्मा को जोन दो का दायित्व सौंपा है। जोन दो में ऊना, कांगड़ा व हमीरपुर जिलों को रखा गया है।

जोन तीन : भू-विज्ञानी अनिल कुमार सिंह राणा व सुरेश भारद्वाज को सिरमौर, सोलन व बिलासपुर जिलों की जिम्मेदारी सौंपी है।

जोन चार : भू-विज्ञानी गौरव शर्मा व सरित चंद्र मंडी, कुल्लू व लाहुल-स्पीति जिलों में खनन से जुड़ी गतिविधियों को देखेंगे। 

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