संसद में फोन टेपिंग पर हुआ बवाल- सरकार बोली- लोकतंत्र को बदनाम करने की साजिश



इजराइली कंपनी के पेगासस सॉफ्टवेयर से फोन टेपिंग की रिपोर्ट पर संसद के मानसून सत्र में जमकर बवाल हुआ

वेब खबरिस्तान। इजराइली कंपनी के पेगासस सॉफ्टवेयर से फोन टेपिंग की रिपोर्ट पर संसद के मानसून सत्र में जमकर बवाल हुआ। कांग्रेस पार्टी की ओर से पत्रकारों समेत दूसरी हस्तियों के फोन टेपिंग की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई। लेकिन सरकार ने इसे खारिज करते हुए कहा कि रिपोर्ट में लीक हुए डेटा का जासूसी से कोई लेना-देना नहीं है। 16 मीडिया समूहों की पड़ताल के बाद जारी इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए सरकार पत्रकारों समेत जानी-मानी हस्तियों की जासूसी करा रही है।

स्टोरी में कई गंभीर आरोप लगाए गये

सेशन के दौरान संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'रविवार की रात एक वेब पोर्टल ने सनसनीखेज स्टोरी पब्लिश की। इसमें कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के एक दिन पहले इस स्टोरी का आना महज संयोग नहीं हो सकता। इससे पहले भी वॉट्सऐप पर पेगासस के इस्तेमाल को लेकर ऐसे ही दावे किए गए थे। उन रिपोर्ट्स में भी कोई फैक्ट नहीं थे और उन्हें सभी ने नकार दिया था। रविवार को छपी रिपोर्ट भारत के लोकतंत्र की छवि खराब करने की कोशिश है।'

हमारे देश में इसके खिलाफ सख्त कानून


अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'जासूसी और अवैध निगरानी के खिलाफ हमारे देश में सख्त कानून हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर किसी इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन को सर्विलांस करते समय नियम-कानून का पूरी तरह से पालन किया जाता है। भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम 1885 की धारा 5 (2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 69 के प्रावधानों के तहत इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट किया जा सकता है। मगर ये तभी किया जाता है, जब कोई सक्षम अधिकारी इसका अनुमोदन करता है।'

रिपोर्ट का दावा – करीब 300 लोगों की जासूसी की गई

रविवार रात जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मंत्रियों, विपक्ष के नेताओं, पत्रकारों, लीगल कम्युनिटी, कारोबारियों, सरकारी अफसरों, वैज्ञानिकों, एक्टिविस्ट समेत करीब 300 लोगों की जासूसी की गई है। द वायर की रिपोर्ट अनुसार इनमें करीब 40 पत्रकार हैं। वॉशिंगटन पोस्ट और द गार्जियन के अनुसार 3 प्रमुख विपक्षी नेताओं, 2 मंत्रियों और एक जज की भी जासूसी की पुष्टि हो चुकी है, हालांकि इनके नाम नहीं बताए हैं। इस जासूसी के लिए इजराइल के पेगासस स्पायवेयर का इस्तेमाल किया गया था।

रिपोर्ट में कहा गया था कि दुनियाभर में 180 से ज्यादा रिपोर्टरों और संपादकों की पहचान की गई है, जिन्हें सरकारों ने निगरानी सूची में रखा है। इन देशों में भारत भी शामिल है, जहां सरकार और प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करने वाले पत्रकार निगरानी के दायरे में थे।

पेगासस ने मीडिया रिपोर्ट को कहा गलत

पेगासस की पेरेंट कंपनी एनएसओ ग्रुप ने फोन हैकिंग पर जारी रिपोर्ट को गलत बताया। उन्होंने बयान में कहा, 'रिपोर्ट गलत अनुमानों और अपुष्ट थ्योरी से भरी हुई है। यह रिपोर्ट ठोस तथ्यों पर आधारित नहीं है। रिपोर्ट में दिया गया ब्योरा हकीकत नहीं है।' कंपनी ने कहा, 'पेगासस इस्तेमाल करने वाले देशों की लिस्ट पूरी तरह गलत है। कई तो पेगासस के क्लाइंट्स भी नहीं हैं।'

Related Links