लव जिहाद बना अपराध, होगी पांच साल की जेल

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मध्य प्रदेश सरकार दिसंबर सत्र में लाएगी लव जिहाद पर विधेयक-2020

भोपाल@wk
लव जिहाद अब अपराध होगा। लव जिहाद किया तो पांच साल के लिए जेल जाना होगा। साथ ही यह अपराध गैर जमानती होगा। इतना ही नहीं लव जिहाद में मदद करने वालों को भी मुख्य आरोपी की तरह ही सजा मिलेगी। मध्य प्रदेश सरकार ने लव जिहाद को रोकने के लिए पहल की है।

जिसके लिए सरकार जल्द ही अगले विधानसभा सत्र में धर्म स्वातंत्रय (संशोधन) विधेयक-2020 लाने जा रही है। इसकी जानकारी एमपी के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दी।उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश विधानसभा का अगला सत्र अगले महीने दिसंबर में होगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही लव जिहाद को लेकर कानून बनाने की घोषणा कर चुके हैं।

विवाह को नहीं मिलेगी मान्यता

इस विधेयक में बहकाने, बलपूर्वक शादी करने और धर्मांतरण करवाने पर पांच साल की कठोर कैद का प्रावधान किया होगा। लव जिहाद की शिकायत सही पाए जाने पर इस प्रकार के विवाह को मान्यता नहीं होगी। उसे शून्य घोषित किया जाएगा। पीड़ित पक्ष के भाई-बहन या माता-पिता की तरफ से शिकायत हो जरूरी है। विवाह के लिए धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को कलेक्टर को एक महीने पहले लिखित में देना जरूरी होगा।

विधेयक का मसौदा तैयार

गृृह विभाग मसौदा तैयार होने के बाद इसे वरिष्ठ सचिव समिति में विचार करने को भेजेगा। जिसके लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। फिर विधि विभाग कानूनी पहलुओं का परीक्षण करेगा। अंत में इसे कैबिनेट में पेश किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कुछ दिन पहले ही लव जिहाद को लेकर कानून बनाने की घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि हम ऐसे लोगों को सबक सिखाने के लिए कानून बनाएंगे। इतना ही नहीं हरियाणा और कर्नाटक भी इसी दिशा में काम कर रहा है।

बेटियों की रक्षा होगी : शर्मा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि भाजपा सरकार ने पहले रेप के लिए सख्त कानून बनाया। प्यार के नाम पर धर्मांतरण कराने को रोकने के लिए अब लव जिहाद रोकने को ठोस कानून बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कानून से बेटियों को धर्मांतरण के चंगुल में फंसने से रोका जा सकेगा और दोषियों को सजा मिलेगी।

मध्य प्रदेश की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा कहते हैं कि कानून बनाए जाने का वह स्वागत करते हैं, लेकिन इसका दुरु पयोग नहीं होना चाहिए। इस कानून की आड़ में किसी को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। न ही किसी को दुर्भावनावश फंसाया जाना चाहिए।

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