विजय सांपला को सीएम कैंडिडेट बनाकर भाजपा कर सकती है सियासी वापसी

विजय सांपला। (फाइल)

विजय सांपला। (फाइल)



एससी आयोग का अध्यक्ष बनाने का फैसला चुनाव के मद्देनजर ही था, 45 शहरी और 34 दलित सीटों पर फोकस करेगी भाजपा

वेब ख़बरिस्तान। किसान आंदोलन के कारण प्रदेश में हाशिए पर चल रही भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति (SC) आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला के दम पर पंजाब में सियासी वापसी की तैयारी में है। पंजाब के दलित चेहरे विजय सांपला को सीएम कैंडिडेट घोषित करने से भाजपा 45 शहरी हिंदु और एससी बहुल और 34 दलित सीटों पर मुकाबले में आ सकती है। वहीं, अगर किसान आंदोलन चुनाव तक किसी निष्कर्ष की ओर जाता है तो नतीजे और बेहतर हो सकते हैं। पिछले कुछ महीने से हाईकमान के साथ-साथ आरएसएस भी इसे लेकर एक्टिव है।

विजय सांपला के बेटे साहिल सांपला ने अपने फेसबुक पेज पर एक न्यूज वेबसाइट की पोस्ट शेयर की है, जिसमें पूछा गया है कि पंजाब में सीएम को ओहदे के लिए कौन सा उम्मीदवार सबसे पसंदीदा है। सबसे पहले विजय सांपला, फिर कैप्टन अमरिंदर सिंह, तीसरे नंबर पर सुखबीर बादल, चौथे पर सिमरनजीत मान, पांचवें पर नवजोत सिद्धू और आखिर में भगवंत मान की तस्वीर है। पोस्ट पर करीब डेढ़ सौ लोगों ने कमेंट भी किए हैं, जिसमें ज्यादातर सांपला को पसंद बताया है। सांपला के बेटे साहिल की ओर से इस पोस्ट को शेयर करने का यही मतलब है कि उन्हें बीजेपी और आरएसएसस की ओर से कोई संदेश मिला है, जिसके बाद ऐसी पोस्ट शेयर कर रहे हैं।

फर्श से अर्श तक


प्लंबर से करियर शुरू करने वाले केंद्रीय राज्य मंत्री विजय सांपला अब एक परिपक्व सियासी लीडर हैं। ये उनकी काब्लियत का ही नतीजा है कि वह पंजाब में पार्टी प्रदेश प्रधान और केंद्रीय राज्य मंत्री साथ-साथ रहे। अब भी वह एसएसी कमिशन में बतौर अध्यक्ष जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 1997 में विजय सांपला के सोफी पिंड के सरपंच चुने गए थे। फिर उन्हें बीजेपी देहाती मंडल के महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई। सांपला ने 2007 में जालंधर वेस्ट से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। मगर, आखिर में एक संघ के नेता की वजह से ही उनका टिकट कट गया और भगत चूनी लाल उम्मीदवार बन गए।

2012 में भी सांपला ने दोबारा जालंधर वेस्ट से टिकट के लिए जोर लगाया। मगर सफलता नहीं मिली। 2014 में होशियारपुर सीट से लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले सांपला को पार्टी ने 2017 में पंजाब का प्रधान बनाकर उनके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा। होशियारपुर संसदीय सीट रिजर्व होने के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में वह टिकट की दौड़ में थे, लेकिन केंद्रीय राज्य मंत्री सोमप्रकाश इसमें बाजी मार गए थे। इसके बाद से वह प्रदेश में संगठन का काम देखने लगे थे। फिर उन्हें एससी कमिशन में अहम जिम्मेदारी मिली।बीजेपी की तैयारी पहले से

दरअसल बीजेपी ने  सांपला को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग चेयरमैन बनाने का फैसला 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर ही किया था। बीजेपी की प्लानिंग है कि विजय सांपला को सीएम कैंडिडेट बनाकर भाजपा पंजाब की 34 रिजर्व विधानसभा सीटों पर प्रभाव डालने की स्थिति में आ जाएगी। पंजाब में 117 में से 34 विधानसभा सीटें रिजर्व हैं। जिनमें भाजपा अब तक पांच सीटों पर चुनाव लड़ती थी। इससे पहले बाकी सीटों पर अकाली दल चुनाव लड़ता था।

बदलेगी बीजेपी की राजनीति

श्वेत मलिक के पंजाब प्रधान बनने के बाद 2019 में सांपला का लोकसभा टिकट कटा तो उनकी विरोधी लॉबी हावी हो गई। सांपला का गुट बिल्कुल हाशिये पर चला गया। 2021 में सांपला को केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का चेयरमैन बनाया था। भाजपा की लीडरशिप तो पहले ही कह चुकी है कि पंजाब में दलित मुख्यमंत्री क्यों नहीं बन सकता है। पंजाब में खेती कानून का डटकर विरोध हुआ। केंद्रीय राज्यमंत्री सोम प्रकाश व अन्य नेता इसे समेट नहीं पाए। जिससे हाईकमान इस लीडरशिप से नाराज चल रही है। सांपला के अगर सीएम का चेहरा बनते हैं तो भाजपा की इंटर्नल पालीटिक्स भी बढ़ेगी। 

बीजेपी की रणनीति

पंजाब की 45 शहरी सीटें हैं, जहां हिंदू वोट बैंक मौजूद है। यहां भाजपा को वोट मिलता है। इस बार आप भी मैदान में है। शहरी वोटर आप की ओर भी झुक रहा है। ऐसे में मुकाबला चौतफा बनता जा रहा है। ऐसे में कौन फायदा ले जाएगा ये कहना जरा मुश्किल है। वहीं, 34 दलितों सीटों पर भी अगर भाजपा मजबूती से प्रचार करती है तो चुनाव का गणित बिगड़ सकता है। बीजेपी अकेले अपने दम पर तो कुछ करने की स्थिती में नहीं लग रही, मगर अगर किसी को बहुमत नहीं मिलता तो संभावनाओं के दरवाजे खुल जाएंगे और कम सीटें होने के बावजूद सरकार बनाने में बीजेपी पहले से ही काफी मजबूत रही है।

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