जालंधर के डीसीपी नरेश डोगरा और साथियों को इरादा कत्ल मामले में कोर्ट ने तलब किया

संमन जारी करते हुए 15 नवंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।

संमन जारी करते हुए 15 नवंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।



15 नवंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश, 2019 में होटल रॉयल प्लाजा में हुई थी मारपीट, दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर दर्ज करवाया था मामला

खबरिस्तान नेटवर्क, होशियारपुर। होशियारपुर के बहुचर्चित होटल रॉयल प्लाजा मामले में होशियारपुर की अदालत ने जालंधर के मौजूदा डीसीपी नरेश डोगरा और साथियों को इरादा कत्ल की धारा-307 के तहत तलब किया है। गौरतलब है कि साल 2019 में होटल रॉयल प्लाजा तब सुर्खियों में आया था जब यहां एक मारपीट के मामले में नरेश डोगरा का नाम सामने आया था। पुलिस कार्रवाई के मुताबिक तीन जनवरी 2019 को होटल के मालिक विश्वनाथ बंटी को रात करीब सवा नौ बजे होटल से एक फोन आया था। होटल मैनेजर ने बताया कि तब फिल्लौर पुलिस अकादमी में तैनात कमांडेंट नरेश डोगरा, होटल का एक अन्य पार्टनर विवेक कोंशल, नायब तहसीलदार मंजीत सिंह, शिवी डोगरा, हरनाम सिंह उर्फ हरमन सिंह सहित करीब 10-15 अज्ञात लोग होटल पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। 

बंटी पर किया था हमला

उसी समय विश्वनाथ बंटी, अजय राणा, नवाब हुसैन और बाबू के साथ होटल पहुंचे और जब उन्होंने नरेश डोगरा से बात करनी चाही तो उन्होंने बंटी पर हमला कर दिया। नरेश डोगरा, विवेक कौशल और मनजीत सिंह ने कहा कि आज बंटी को मारना है। तभी हरनाम सिंह ने बंटी की तरफ रिवॉल्वर से गोली चलाई, जो अजय राणा की जांघ से पार हो गई,  जबकि नवाब हुसैन गंभीर रूप से घायल हो गया। अदालत के आदेश में ये भी कहा गया है कि जब अजय राणा को गंभीर हालत में होशियारपुर के सिविल अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया तो पता चला कि नरेश डोगरा और उसके साथी पहले ही सिविल अस्पताल होशियारपुर पहुंच चुके थे और अजय राणा, नवाब हुसैन को जालंधर के जौहल अस्पताल में ले जाया गया और वहां 6 जनवरी तक उसका इलाज चला और बाद में अजय राणा को होशियारपुर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

पुलिस की एकतरफा कार्रवाई


होशियारपुर के अतिरिक्त मुखय न्यायिक मैजिस्ट्रेट रूपिंदर सिंह द्वारा 14 सितंबर 2022 को दिए फैसले की कापी 15 सितंबर को अपलोड की गई है, जिसके मुताबिक होशियारपुर पुलिस ने मामले में एकतरफा कार्रवाई की है। नरेश डोगरा जो उस समय एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी था ने विशवानाथ बंटी और उनके साथियों को मुलजिम बनाने के लिए पद का गलत इस्तेमाल किया था। जिसके बाद विश्वनाथ बंटी, अजय राणा, नवाब हुसैन और कई अन्य लोगों पर आईपीसी की धारा 307, 323, 341, 379-बी, 186, 353, 332, 427, 148, 149, 120-बी व 25/27/54/59, आमर्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। जबकि विश्वनाथ बंटी गुट की ओर से दर्ज कराई शिकायत पर आईपीसी की धारा-323, 506, 149, आई.पी.सी. सिर्फ थाने के रोजनामचे में सिर्फ डीडीआर ही काटी गई थी।

दायर करनी पड़ी थी सिविल कंपलेट

पुलिस ने जब मामले में कोई कार्रवाई नहीं की तो नवाब हुसैन की ओर से उनके वकील एचएस सैनी, एडवोकेट नवीन जैरथ और एडवोकेट गुरवीर सिंह चौटाला की ओर से कोर्ट में सिवल शिकायत दर्ज कराई गई, जिसकी सुनवाई करीब तीन साल तक चली, हालांकि कोविड के कारण, सुनवाई में लगभग एक साल की देरी हुई और अदालत ने अब मामले की गंभीरता को देखते हुए जालंधर में तैनात डीसीपी नरेश डोगरा, होटल रॉयल प्लाजा के पार्टनर विवेक कौशल, नायब तहसीलदार (सेवानिवृत्त) मंजीत सिंह, शिवी डोगरा और हरनाम सिंह उर्फ हरमन सिंह को आईपीसी की धारा-307, 506, 341, 447, 323, 148, 149, 25/27 /54/59 आर्म्स एक्ट के तहत संमन जारी करते हुए 15 नवंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।

डोगरा की गिरफ्तारी हो सकती है

कोर्ट के फैसले के बाद डीसीपी नरेश डोगरा, विवेक कौशल, शिवी डोगरा, मंजीत सिंह और हरनाम सिंह उर्फ हरमन सिंह को 15 नवंबर से पहले हाईकोर्ट से जमानत लेनी पड़ेगी, चूंकि मामला 307 का है, इसलिए मामले में अग्रिम जमानत मिलना इतना आसान नहीं है क्योंकि गोली और 307 के मामले में अदालतें हमेशा सखत रुख अपनाती हैं। गौरतलब है कि जब पुलिस किसी मामले की सुनवाई नहीं करती है तो पीड़ित के पास सीधे अदालत जाने का विकल्प होता है और इसी विकल्प के तहत मामला यहां तक पहुंचा है।

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