गोली से जख्मी सचिन जैन को चार अस्पतालों में इलाज न मिलने के मामले की जांच के लिए डीसी ने बनाई कमेटी



लुटेरों ने मारी थी गोलियां, टैगोर, सत्यम, जोशी और अरमान अस्पताल में नहीं मिला था इलाज, समय पर इलाज न मिलने से हुई थी मौत

वेब खबरिस्तान। जैन करियाना स्टोर के मालिक सचिन जैन को लुटेरों की गोली लगने के बाद चार अस्पतालों में इलाज न मिलने के कारण हुई मौत के मामले की जांच के लिए डीसी ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। सोमवार की रात 9 बजे सोढल रोड पर मथुरा नगर स्थित जैन करियाना स्टोर के मालिक सचिन जैन को तीन लुटेरों ने गोलियां मार दी थी। जख्मी सचिन को ट्रीटमेंट के लिये एक्टिवा पर 4 अस्पतालों में लेकर गये लेकिन उसे ट्रीटमेंट नहीं मिला था। अंत में उसे सिविल अस्पताल लेकर गये जहाँ उसे प्राथमिक उपचार दिया गया। रात 10:15 बजे जौहल अस्पताल ले गये। मंगलवार सुबह 26 वर्षीय सचिन की मौत हो गई थी। मौत का कारण इलाज में देरी बताया गया था।  


सचिन की मौत के बाद शहर में अस्पतालों के खिलाफ आवाज उठी थी। मोबाइल एसोसिएशन मॉडल टाउन मार्केट के प्रधान राजीव दुग्गल ने सोशल मीडिया पर ऑडियो मैसेज भेजकर इस मामले में अस्पतालों पर लापरवाही के आरोप लगया थे। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक कोई भी अस्पताल मरीज को इलाज देने से मना नहीं कर सकता। इस मामले में लगातार प्रशासन पर भी कोई एक्शन न लेने के कारण सवाल उठ रहे थे। अब डीसी घनश्याम थोरी ने असिस्टेंट कमिश्नर रणदीप सिंह गिल, डीएमसी डाक्टर ज्योति शर्मा और एसीएस डाक्टर वरिंदर सिंह थिंद की कमेटी बनाई है, जो इस मामले की जांच करेगी। अगले हफ्ते तक रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। 

45 मिनट तक एक्टिवा पर लेकर भटकते रहे

सोढल रोड पर खिलौनों की दुकान चलाने वाले मिक्की ने मीडिया को बताया था कि वह दुकान बंद कर ही रहे थे कि लोगों ने बताया सचिन को किसी ने गोली मार दी है। जख्मी हालत में तुरंत सचिन को एक्टिवा पर बैठाया और उसे अस्पताल लेकर गये लेकिन टैगोर अस्पताल ने उसे भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद उसे सत्यम, जोशी और अरमान अस्पताल लेकर गये वहां भी पुलिस केस का हवाला देकर किसी ने भर्ती नहीं किया। 45 मिनट तक हम अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। इसके बाद सिविल अस्पताल लेकर गये। 

टैगोर अस्पताल के पास नहीं था सर्जन

टैगोर अस्पताल के एमडी डॉ. विजय महाजन ने कहा कि जिस समय परिजन सचिन को लेकर अस्पताल आए उस समय हमारे पास सर्जन मौजूद नहीं था। इसलिए हमने समय व्यर्थ ना करते हुए उन्हें दूसरे अस्पताल लेकर जाने को कहा। चूंकि अगर 5 मिनट की भी ओर देर हो जाती तो प्रॉब्लम हो सकती थी। 

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