विधानसभा चुनाव की टिकट को लेकर भाजपा में मारामारी, 4 हजार से जयादा नेता ने ठोकी दावेदारी

बीजेपी में टिकट को लेकर मची होड़

बीजेपी में टिकट को लेकर मची होड़



पंजाब में 4 हजार से ज्यादा नेताओं ने चुनाव लड़ने की जताई इच्छा 

वेब खबरिस्तानः किसान आन्दोलन के दौरान जब किसानों का पंजाब में भारतीय जनता पार्टी के प्रति विरोध चरम पर था उस वक्त हर कोई पार्टी के साथ चलने से बच रहा था। ताकि उसे भी कहीं किसानों के विरोध का शिकार न होने पड़ जाए। लेकिन कहते हैं कि ‘सब दिनु होत न एक समाना’, किसान आन्दोलन खत्म हुआ तो पंजाब में भाजपा के हालात भी कुछ ठीक हुए, जब भाजपा ने धकमाकेदार तरीके से पंजाब में एंट्री की तो भाजपा के साथ चलने से बचने वाले भी अब अपने आप को वफादार सिपाही बताने लगे हैं। यही वजह से है कि विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य में 4028 लोगों ने टिकट के लिए आवेदन किया है, जिस संख्या में टिकट के लिए आवेदन आए हैं उन्हें देखकर पार्टी के उच्चपदस्थ नेता भी हैरन हैं। उन्होंने भी कभी ऐसा नहीं सोचा था कि पंजाब में किसानों के विरोध के बावजूद इतने लोग टिकट के लिए आवेदन करेंगे। अधिकतर आवेदन कार्यसमिति के सदस्यों, जिला अध्यक्षों के माध्यम से पंजाब के संगठन के पास पहुंचे हैं, जबकि बहुत सारे ऐसे भी हैं जिन्होंने किसी भी माध्यम को एक तरफ कर सीधे आवेदन किया है। सबसे ज्यादा आवेदन पंजाब की हिंदु डोमिनेटेड बेल्ट दोआबा, माझा, पुआद और शहरी क्षेत्रों से प्राप्त हुए हैं, जबकि सबसे कम आवेदन बठिंडा से प्राप्त हुए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, पटियाला, होशियारपुर, पठानकोट, मोहाली से मिले हैं। चूंकि शहरी क्षेत्रों में हिंदु ज्यादाल हैं और इन शहरों में भाजपा का कहीं न कहीं आधार भी है। इसलिए इन शहरों से टिकट के ज्यादा तलबगार सामने आए हैं। अभी तक तो यह वह हैं जिन्होंने खुद टिकट के लिए आवेदन किया है वो अलग हैं जिन्हें पार्टी खुद चुनावी दंगल में उतारने के लिए दूसरी पार्टियों से तोड़कर लाई है।  

राज्य सगंठन की तरफ से छंटनी की जाएगी  

भाजपा नेताओं ने बताया कि जितने भी आवेदन प्राप्त हुए हैं उनकी पहले राज्य सगंठन की तरफ से छंटनी की जाएगी। इसके बाद जो नाम बचेंगे उनकी सूची आलाकमान के पास फाइनल सूची के लिए भेजा जाएगा। राज्य के स्तर पर पंजाब चुनाव प्रभारी, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष, क्षेत्रीय संगठन मंत्री, राज्य संगठन मंत्री और प्रांत संघ प्रचारक समेत कुछ वरिष्ठ नेताओं का एक पैनल आए हुए आवेदनों में से चर्चा के बाद एक सूची तैयार करेगा। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष और गठबंधन के नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह,  भाजपा के पंजाब प्रभारी,  भाजपा चुनाव प्रभारी टिकटों पर फैसला लेंगे।  दूसरे दलों से आने वाले नेताओं का लगा तांता भाजपा में दूसरे दलों से आने वाले नेताओं का तांता लगा हुआ है। इनमे से ज्यादातर अपनी पार्टी को इसलिए छोड़ कर नहीं आ रहे कि वहां पर कोई रचनात्कमता नहीं रह गई थी या फिर वह डूबता जहाज था और उनकी वहां पर कोई पूछ पड़ताल नहीं थी। बल्कि इस लिए आ रहे हैं कि भाजपा ने पंजाब में एंट्री की है और एंट्री के साथ ही भाजपा अपने दम पर पंजाब में चुनाव लड़ने के लिए उतरी है। एसे में उन्हें पार्टी का टिकट लेनेमें कोई परेशानी नहीं होगी वह आसानी से इसे झटक लेंगें। लेकिन जिस तरह से टिकट के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं उससे एसे नेताओं के मंसूबों पर पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है। 

जो इम्पैक्ट फेस टू फेस प्रचार में आता है वह वर्चुअल में नहीं आ सकता


डी.ए.वी. कालेज अमृतसर में राजनीति विभाग के प्रमुख प्रोफैसर सुरिंदर कुमार ने कहा कि जितना इम्पैक्ट फेस टू फेस चुनाव प्रचार में आता है वह वर्चुअल में नहीं आ सकता। लोगों के घर पर जब कोई लीडर दस्तक देता है तो उसे यह लगता है कि वह उसके घर पर आया था। इससे लोग अपने मांगे भी उसके समक्ष रखते हैं, जब आपस में बात होती है तो दोनों में जिम्मेदारी की भावना का संबंध भी स्थापित होता है, जहां तक वर्चुअल का सवाल है तो देखना यह होगा कि वह कितने लोगों तक पहुंचता है। यदि आप अपना क्लिप बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी करते हैं तो इसकी क्या गारंटी है कि लोगों ने उसे देखा सुना या नहीं। यदि कोई अपने फेसबुक पेज पर या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लाइव होता है तो उस वक्त भी गौर करने वाली बात यह होगी कि उन्हें देख कितने लोग रहे हैं। वह कितनी देर पेज पर एंगेज रहे। 

कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंक कर मनाई लोहड़ी

 पंजाब के सरकार के खिलाफ कर्मचारी किस कद्र भरे हुए हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है राज्य में चुनाव की घोषणा के बावजूद सरकार से त्रस्त कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने लोहड़ी का त्यौहार अनोखे तरीके से मनाते हुए सूबे के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का पुतला फूंका। बेशक पंजाब में चुनाव घोषित होने के बाद अब सरकार चुनाव आयोग ही है। कोई भी फैसला लेने या घोषणा करने की सत्तधारी दल के पास कोई पावर नहीं है इसका पता होने के बावजूद कर्मचारियों ने पुतला फूंकने के बाद मुख्यमंत्री चन्नी और उनके मंत्रियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर अपना गुवार निकाला। कर्मचारी नेता करनैल फिल्लौर ने कहा कि चन्नी ने पूरे पंजाब में बड़े-बड़े बोर्ड बैनर लगाकर प्रचार किया राज्य के 36000 हजार कर्मचारियों को पक्का कर दिया गया है। लेकिन अब हकीकत सभी के सामने हैं। जो बिल सरकार ने विधानसभा में पारित किया था वह राज्यपाल से पास सही नहीं हुआ। कर्मचारियों के चन्नी ने ठगने का काम किया। पिछले कई सालों से कर्मचारी कहते आ रहे हैं कि पुरानी पेंशन बहाल की जाए लेकिन उसका कुछ नहीं बना। छठे वेतन आयोग में भी सरकार ने एक हाथ से दिया तो पुराने मिलते आ रहे फंड बंद करके दूसरे हाथ से छीन लिया।  

पंजाब से होगी गोलीबारी, गुंडागर्दी, डकैती जैसी घटनाएं समाप्त 

भाजयुमो नेता बोले, यूपी-बिहार की तर्ज पर पंजाब से भी गोलीबारी, गुंडागर्दी, डकैती जैसी घटनाएं समाप्त करेगी भाजपा पंजाब की कांग्रेस सरकार राज्य में अराजक तत्वों पर नकेल डालने और कानून व्य़वस्थता कायम रखने में पूरी तरह से विफल रही है। पंजाब में भाजपा का सरकार आई को राज्य में फैली गुंडागर्दी बढ़ रही डकैती और गोलीबारी की घटनाओं पर लगाम के लिए यूपी और बिहार का माडल लागू करेगी। यह उदगार आज पंजाब भाजपा युवा मोर्चा के उप-प्रधान अशोक सरीन हिक्की (एडवोकेट),  आशुतोष तिवाड़ी,  महामंत्री नरिंदरपाल ढिल्लों ने भाजपा कार्यालय में रखी गई पत्रकार वार्ता के दौरान प्रकट किए।

Related Tags


Fight for BJP ticket

Related Links