Mohali हमले की पहली सीसीटीवी फुटेज आई सामने, संदिग्ध हमलावर भी आए नजर, तीन युवक गिरफ्तार

Mohali हमले की पहली सीसीटीवी फुटेज आई सामने

Mohali हमले की पहली सीसीटीवी फुटेज आई सामने



मोहाली पुलिस ने निशान के साले सोनू को अमृतसर से गिरफ्तार किया, इस केस में तरनतारन के गांव मेहंदीपुर का रहने वाले जगरूप सिंह को भी पकड़ा

वेब ख़बरिस्तान। पंजाब पुलिस के मोहाली स्थित इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर हमले का पहला सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। जिसमें दिख रहा है कि हमलावरों ने कार से ही रॉकेट दागा। जिस वक्त धमाका हुआ, कार वहां से गुजरती हुई भी नजर आई। फुटेज में हमलावरों की स्विफ्ट कार भी नजर आई है। वहीं संदिग्ध हमलावर भी नजर आए हैं।

इस मामले में पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें पहला नाम तरनतारन के भिखीविंड के रहने वाले निशान सिंह का है। निशान सिंह तरनतारन के भिखीविंड के गांव कुल्ला का रहने वाला है। उस पर कई केस दर्ज हैं। करीब डेढ़ महीने पहले वह जमानत पर बाहर आया था। उसका गांव भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के नजदीक है। मोहाली और फरीदकोट की पुलिस ने जॉइंट एक्शन कर उसे फरीदकोट से गिरफ्तार किया।

निशान के बाद दो और आरोपी पकड़े


उससे पूछताछ के बाद निशान के साले सोनू को अमृतसर से गिरफ्तार किया गया। मोहाली पुलिस ने इस केस में तरनतारन के गांव मेहंदीपुर का रहने वाला जगरूप सिंह को भी पकड़ा गया है। उस पर पहले भी कत्ल का केस दर्ज है। वह पैरोल पर बाहर आया है। मेहंदीपुर गांव भी भारत-पाक बॉर्डर के नजदीक स्थित है।

इस साजिश का अब पाकिस्तानी कनेक्शन भी सामने आ रहा है। इस अटैक के पीछे पाकिस्तान में बैठे कुख्यात गैंगस्टर हरविंदर सिंह उर्फ रिंदा को माना जा रहा है। माना जा रहा है कि रिंदा ने ही ड्रोन के जरिए यह रॉकेट लांचर पंजाब भिजवाया। पुलिस अब निशान सिंह और जगरूप सिंह से पाकिस्तान बैठे रिंदा से संपर्क के बारे में पूछताछ कर रही है। पंजाब की CM भगवंत मान सरकार ने हाल ही में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स बनाकर गैंगस्टर्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। 

हमले में रूसी रॉकेट लांचर का इस्तेमाल

हमले में रूसी रॉकेट लांचर का इस्तेमाल किया गया था। मंगलवार देर रात को पुलिस ने इसे रिकवर करने के बाद यह दावा किया। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका ने यह हथियार ट्रेनिंग के लिए अफगानिस्तान को दिए थे। वहां तालिबान ने कब्जा कर लिया। जिसके बाद यह हथियार पाकिस्तान को बेच दिए गए।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए इस रॉकेट लांचर को पंजाब पहुंचाया गया है। इस हमले के पीछे पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस रिकॉर्ड और नेटवर्क को तबाह करने की साजिश थी। पंजाब डीजीपी वीके भावरा ने आशंका जाहिर की है कि हमले के लिए ट्राइ नाइट्रो टाल्यून का इस्तेमाल हो सकता है, यानी पूरी इमारत को उड़ाने की साजिश थी। विशेषज्ञों के मुताबिक मोहाली में दागा रॉकेट ग्रेनेड अमेरिका ने अफगानिस्तान और फिर तालिबान ने पाकिस्तान को बेचे थे।

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