कमल छोड़कर थामा था पंजे वाला हाथ, फिर कैप्टन के लिए मुसीबत बने सिद्धू



शुरुआत से ही अपने बड़बोलेपन के लिए विवादों में रहते आए हैं नवजोत सिद्धू

वेब ख़बरिस्तान। नवजोत सिंह सिद्धू ने 2004 में सियासत में कदम रखा था। वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण जेटली ने 2004 में सिद्धू को पार्टी ज्वाइन करवाई थी। सिद्धू ने पहली बार अमृतसर लोकसभा सीट से कांग्रेस के कद्दावर नेता रघुनंदन लाल भाटिया को बड़े अंतर से हराया था।


गैर इरादतन हत्या केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले सिद्धू ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। कोर्ट से चुनाव लडऩे की इजाजत मिलने के बाद 2007 में अमृतसर से ही सिद्धू ने उपचुनाव लड़ा और कांग्रेस नेता सुरिंदर सिंगला को हराया। 2009 में सिद्धू ने ओपी सोनी को हराया। फिर 2014 में भाजपा से उन्हें राज्यसभा भेज दिया। 2017 में राज्यसभा से इस्तीफा देकर सिद्धू ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। कैप्टन सरकार में उन्हें स्थानीय निकाय मंत्री बनाया गया। मगर सीएम कैप्टन अमरिंदर से उनकी नहीं बनी और 2019 में उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया।

सिद्धू और विवाद साथ-साथ

जहां सिद्धू वहां विवाद। ऐसा अक्सर होता आया है। मोहम्मद अजहरूद्दीन की कप्तानी में खेलने से मना कर इंग्लैंड का दौरा बीच में ही छोड़ कर सिद्धू वापस आ गए थे। जब सिद्धू भाजपा में थे तो हमेशा अकाली दल से अलग होने की बातें करते थे। 2014 में जब जेटली ने अमृतसर से चुनाव लड़ा तो सिद्धू साथ नजर नहीं आए। 

कांग्रेस में आने के बाद वह अपने ही नेता से उलझते रहे। 2019 में सिद्धू ने कमेंट किया कि अमरिंदर सिंह पंजाब के कैप्टन हैं, लेकिन उनके  कैप्टन राहुल गांधी हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में सिद्धू ने बठिंडा में बयान दे दिया कि कैप्टन और बादलों के कारोबार की सांझ है। कांग्रेस पांच सीटें हारीं तो कैप्टन ने सिद्धू का विभाग बदला तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया। 

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