बैडमिंटन टूर्नामेंट: 20 साल की मालविका ने हराया साईना नेहवाल को, रचा इतिहास

बैडमिंटन में  साईना नेहवाल को  हर रचा इतिहास

बैडमिंटन में साईना नेहवाल को हर रचा इतिहास



महाराष्ट्र स्थित एक नॉन-प्रॉफिटेबल संगठन द्वारा नाग भूषण पुरस्कार, खेलो इंडिया टैलेंट डेवलपमेंट एथलीट अवार्ड किये आपने नाम

वेब ख़बरिस्तान। मालविका बनसोड ने इंडियन ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट में गुरुवार को दिग्गज खिलाड़ी और लंदन ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट साइना नेहवाल को पछाड़ कर जीत हासिल की। अआप्को बता दें महिला सिंगल्स के दूसरे राउंड के मुकाबले में मालविका ने साइना को लगातार गेम में 21-17, 21-9 से हराया। यह मैच लगभग 34 मिनट तक चला। वर्ल्ड रैंकिंग में साइना इस समय 25वें नंबर पर हैं। वहीं मालविका की रैंक 111वीं है।

बैडमिंटन की उभरती हुई स्टार

महाराष्ट्र की 20 साल की मालविका मौजूदा समय में बैडमिंटन की उभरती हुई स्पोर्ट्स स्टार हैं। वे अंडर-13 और अंडर-17 लेवल पर स्टेट चैंपियनशिप का ख़िताब जीत चुकी हैं। 2018 में मालविका वर्ल्ड जूनियर बैडमिंटन टूर्नामेंट के लिए भारतीय टीम में सिलेक्ट हुई थीं। मालविका 2018 में काठमांडू में साउथ एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप का ख़िताब भी अपने नाम किया था। 2019 में उन्होंने ऑल इंडिया सीनियर रैंकिंग टूर्नामेंट जीत कर एक और जीत अपने नाम की थी। 2019 में ही मालविका ने मालदीव इंटरनेशनल फ्यूचर सीरीज टूर्नामेंट भी जीता।

लंदन ओलंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट साइना नेहवाल को हराया  


साइना नेहवाल को अपना आदर्श मानने वाली मालविका ने उनको हराकर इतिहास रच दिया है। इतना ही नहीं मालविका, लंदन ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडलिस्ट साइना नेहवाल को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन सर्किट में कोर्ट पर हराने वाली दूसरी भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले साल 2007 में पीवी सिंधु ने भीं साइना नेहवाल को हराया था। साइना के खिलाफ खेलने के बाद मालविका ने कहा, 'मैं बचपन से उन्हें देखती आई हूं। वो मेरी आदर्श हैं। उन्हें हराना मेरे लिए किसी सपने के सच होने जैसा है।'

जानें कौन है मालविका बनसोड?

मालविका बनसोड का जन्म 15 सितंबर, 2001 में महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था। मालविका एक उच्च शिक्षित परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता दोनों डेंटिस्ट हैं। उनकी मां ने अपनी बेटी को बैडमिंटन करियर में मदद करने के लिए स्पोर्ट्स साइंस में मास्टर डिग्री हासिल की। मालविका ने आठ साल की उम्र में बैडमिंटन खलेने के ताराग अपना पहला कदम बढाया था। इतना ही नहीं बैडमिंटन खलेने के साथ साथ उन्होंने अपनी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 90% स्कोर किया था।

बहुत से गोल्ड मैडल जीते

मालविका ने नेशनल लेवल पर कई गोल्ड मेडल अपने नाम किये हैं। उन्होंने महाराष्ट्र स्थित एक नॉन-प्रॉफिटेबल संगठन द्वारा नाग भूषण पुरस्कार, खेलो इंडिया टैलेंट डेवलपमेंट एथलीट अवार्ड और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) एथलीट अवार्ड जैसे कई पुरस्कार जीते हैं। आपको बता दें मालविका दो बार के ओलंपिक चैंपियन लिन डैन को आदर्श मानती हैं, जो एक लेफ्ट हैंडर खिलाड़ी हैं। वह अपने जीवन में किसी दिन चीनी शटलर से मिलने की उम्मीद करती हैं।

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