अमेरिका और ताइवान की चीन के खिलाफ जंग की तैयारी, फौजें हाईअलर्ट पर, चीन ने भी मिलिट्री ड्रिल की

सांकेतिक तस्वीर।

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अमेरिकी स्पीकर नैंसी ताईपेई जाएंगी,  अमेरिका के 4 वॉरशिप ताइवान के नजदीक पहुंचे

खबरिस्तान नेटवर्क। ताइवान में बड़े युद्ध की आशंका है। अमेरिका, ताइवान और चीन तीनों ने अपनी फौजों को कॉम्बेट रेडी (जंग के लिए तैयार) रहने को कहा है। मंगलवार देर शाम तीनों ने फौजों के लिए हाईअलर्ट भी जारी किया है। दरअसल, चीन के विरोध के बावजूद अमेरिकी संसद के निचले सदन (भारत में लोकसभा की तरह) हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पीकर नैंसी पेलोसी ताइवान दौरे पर निकल पड़ी हैं। कुछ देर में ताईपेई पहुंचेंगी। नाराज चीन ने धमकी दी है कि इसके गंभीर परिणाम निकलेंगे। चीन ने ताइवान सीमा के पास मिलिट्री ड्रिल की है।

पेलोसी आज रात ताइवान पहुंचेंगी

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्टके मुताबिक  शुरूआत में कुछ झिझक दिखाने के बाद अब जो बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन ने चीन से सीधे निपटने के लिए तैयारी कर ली है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सूत्रों के मुताबिक, अगर पेलोसी का एयरक्राफ्ट ताइवान की तरफ गया तो चीनी एयरफोर्स की फ्लीट उसको घेर लेगा। हालांकि, उन्हें रोका नहीं जाएगा।

इसके लिए चीन की एयरफोर्स ने सोमवार के बाद मंगलवार को भी एयरफोर्स और नेवी ड्रिल की। हालांकि, चीन कितना बड़ा एक्शन लेगा, ये स्पष्ट नहीं है। इस क्षेत्र में अमेरिकी ताकत भी कम नहीं है।


ताइवान और अमेरिका भी तैयार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ताइवान की सेनाएं चीन से निपटने के लिए तैयारी कर चुकी हैं। अमेरिकी नेवी के 4 वॉरशिप हाईअलर्ट पर ताइवान की समुद्री सीमा में गश्त कर रहे हैं। इन पर एफ-16 और एफ-35 जैसे हाईली एडवांस्ड फाइटर जेट्स और मिसाइलें मौजूद हैं। रीपर ड्रोन और लेजर गाइडेड मिसाइल भी तैयार हैं। अगर चीन कोई कदम उठाता है तो अमेरिका और ताइवान उस पर दोनों तरफ से हमला कर सकते हैं।

अमेरिकी एक्सपर्ट ताइवान पहुंचे

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा है कि पेलोसी के दौरे के कई दिन पहले ही अमेरिका के कई सैनिक और मिलिट्री टेक्निकल एक्सपर्ट ताइवान पहुंच चुके हैं। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका अब यह तय कर चुका है कि साउथ चाइना सी या ताइवान स्ट्रैट में चीन की दादागीरी पर लगाम कसनी ही होगी।

हालांकि अमेरिका ने अब तक यह साफ नहीं किया है कि उसके सैनिक ताइवान में मौजूद हैं या नहीं। पिछले हफ्ते जब पेंटागन के प्रवक्ता से इस बारे में सवाल किया गया था तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था।

ताइवान पर झगड़ा क्यों

चीन वन-चाइना पॉलिसी के तहत ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को स्वतंत्र देश कहता है। चीन का लक्ष्‍य ताइवान को उनकी राजनीतिक मांग के आगे झुकने और चीन के कब्‍जे को मानने के लिए ताइवान को मज‍बूर करने है।

इधर, अमेरिका भी वन चाइना पॉलिसी को मानता है, लेकिन ताइवान पर चीन के कब्जे के लिए सहमत नहीं है। बाइडेन ने 2 महीने पहले कहा था- हम वन चाइना पॉलिसी पर राजी हुए, हमने उस पर साइन किया, लेकिन ये सोचना गलत है कि ताइवान को बल के प्रयोग से छीना जा सकता है। चीन का ये कदम न केवल गलत होगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र को एक तरह की नई जंग में झोंक देगा।

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