ख़बरिस्तान नेटवर्क : पंजाब के सुल्तानपुर लोधी से एक बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश गए 21 वर्षीय युवक कमल कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। गरीबी और बेरोजगारी से तंग आकर सुनहरे सपनों के साथ परदेस गए कमल को क्या पता था कि वहां की मिट्टी उसे हमेशा के लिए अपनों से छीन लेगी। कमल की मौत की खबर मिलते ही उसके परिवार और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। शोक में मां अपनी सुध-बुध खो चुकी है और सरकार से केवल एक ही मांग कर रही है कि उसके बेटे का शव अंतिम बार देखने के लिए भारत लाया जाए।
गरीबी के साये में बीता बचपन, अच्छे भविष्य के लिए बाहर भेजा
कमल के जीवन की कहानी संघर्षों से भरी रही है। महज 6 वर्ष की कोमल आयु में ही उसके सिर से पिता का साया उठ गया था। उसके बाद उसकी मां ने समाज की परवाह न करते हुए दूसरों की शादियों में खाना बनाकर और कड़ी मेहनत-मजदूरी करके अपने बेटे को पाला-पोसा। आज भी यह परिवार किराए के मकान में रहने को मजबूर है, लेकिन बेटे की कामयाबी की उम्मीद में मां ने अपनी सारी जमापूंजी और भारी कर्ज लेकर उसे विदेश भेजा था ताकि परिवार के अच्छे दिन फिर आ सकें।
एजेंटों की धोखाधड़ी और बेरोजगारी ने ली मासूम की जान
विदेशी धरती पर पहुंचने के बाद कमल के सामने जो हकीकत आई, वह एजेंटों द्वारा दिखाए गए सपनों से बिल्कुल उलट थी। एजेंटों ने लाखों रुपये ऐंठ लिए लेकिन वहां न तो उसे कोई अच्छी नौकरी मिली और न ही रहने का कोई ठिकाना। बेरोजगारी की मार झेल रहे कमल के पास पेट भरने तक के पैसे नहीं बचे थे।
एक तरफ कर्ज का बढ़ता बोझ और दूसरी तरफ परदेस में तन्हाई और भूख, इन सब ने कमल को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया। वह अक्सर फोन पर अपनी बेबसी का जिक्र करता था। इस वजह से तनाव और मानसिक दबाव के कारण महज 21 साल की उम्र में उसे दिल का दौरा पड़ गया, जिस कारण उसकी मौत हो गई।
केंद्र और राज्य सरकार से अंतिम विदाई की भावुक अपील
कमल की मां का रो-रोकर बुरा हाल है और वह बार-बार अपनी बेबसी का इजहार कर रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपना इकलौता सहारा खो दिया है और अब उनके पास खोने को कुछ नहीं बचा। बेबस मां ने हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री और पंजाब के मुख्यमंत्री से अपील की है कि उनके बेटे के पार्थिव शरीर को वतन लाने में मदद की जाए। वह बस एक बार अपने कलेजे के टुकड़े का आखिरी बार चेहरा देखना चाहती हैं ताकि उसे सम्मानजनक विदाई दी जा सके।