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मिशन 2022 - अकाली और बसपा चलेंगे साथ-साथ

वेब ख़बरिस्तान। 2022 के चुनाव के लिए अकाली दल और बसपा ने हाथ मिले लिए हैं। चंडीगढ़ में सुखबीर बादल और सतीश मिश्रा ने इसका ऐलान किया है।

अकाली दल और बसपा का पुराना नाता

1996 लोकसभा चुनाव दोनों पार्टियों ने साथ लड़ा था। बसपा ने होशियारपुर, फिल्लौर और फिरोजपुर सीट जीती थी। मगर अगले ही साल ये गठबंधन टूट भी गया। अकाली दल ने बीजेपी का दामन थाम लिया था।

अकालियों को चाहिए था साथ

खेती कानून को लेकर बीजेपी से नाता तोड़ने के बाद अकाली दल पंजाब में गठबंधन के लिए साथी तलाश रहा था। बसपा के रूप में अकाली दल को मजबूत पार्टनर मिल गया है।

पंजाब में बसपा की जड़ें

कांशी राम ने छह दिसंबर 1978 को बामसेफ संगठन बनाया। छह दिसंबर 1981 को डीएस 4 संगठन बनाया, जिसका मतल था दलित शोषित समाज संघर्ष समिति, जो आगे चलकर 14 अप्रैल 1984 को बहुजन समाज पार्टी बनी।

लोकसभा में चार सीटें जीतीं

बसपा ने 1989 लोक सभा चुनाव में पंजाब में एक और 1996 लोक सभा चुनाव में पंजाब में तीन सीटें जीतीं। 2014 में हुए 16वें लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुला।

मायावती चार बार रहीं मुख्यमंत्री

मायावती बसपा सुप्रीमो हैं। मायावती चार बार यूपी की मुख्‍यमंत्री रहीं। 1995, 1997, 2002 में कार्यकाल पूरा नहीं कर सकीं। चौथी बार 2007 में सीएम बनीं

कौन हैं सतीश मिश्रा

मायावती ने 2007 में 'सोशल इंजीनियरिंग' का सहारा लिया। उन्होंने सतीश मिश्रा को पार्टी में अहम भूमिका दी और सवर्णों (ब्राह्मण, राजपूति आदि) को भी पार्टी में टिकटें दीं। मिश्रा अब राज्यसभा सांसद हैं।

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