रोहतक की सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 40 दिन की पैरोल दी गई है।साध्वियों से दुष्कर्म और पत्रकार हत्या के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहा राम रहीम पैरोल अवधि के दौरान डेरा सच्चा सौदा के सिरसा स्थित मुख्यालय में रहेगा।
गौरतलब है कि अगस्त 2017 में रेप केस में दोषी ठहराए जाने के बाद यह 15वीं बार होगा जब गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आएगा। इससे पहले 15 अगस्त को वह अपना जन्मदिन मनाने के लिए सुनारिया जेल से बाहर आया था।
2017 से जेल में बंद है राम रहीम
25 अगस्त 2017 को दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में राम रहीम को 20 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद 17 जनवरी 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में उसे उम्र कैद की सजा मिली। वहीं, डेरा मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के मामले में अक्टूबर 2021 में सीबीआई कोर्ट ने भी उम्र कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा मिलने के तीन साल बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में उसे बरी कर दिया।
फिलहाल गुरमीत राम रहीम रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। यहां से वह पैरोल और फरलो पर अब तक 14 बार बाहर आ चुका है, जबकि यह 15वां मौका है जब उसे जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है।
पैरोल और फरलो क्या होती है?
पैरोल वह सुविधा है, जिसमें सजा का एक हिस्सा पूरा करने के बाद कैदी को विशेष परिस्थितियों में अस्थायी रूप से रिहा किया जाता है। यह दो तरह की होती है, रेगुलर और कस्टडी पैरोल। रेगुलर पैरोल में कैदी स्वतंत्र रहता है, जबकि कस्टडी पैरोल में उसके साथ पुलिस मौजूद रहती है।
वहीं फरलो कैदी का कानूनी अधिकार माना जाता है, जिसके लिए किसी विशेष कारण की आवश्यकता नहीं होती। फरलो से जुड़े नियम और दिशानिर्देश राज्यों के अनुसार अलग-अलग होते हैं।