ख़बरिस्तान नेटवर्क : सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी प्राइवेट-सरकारी स्कूलों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में लड़कियों को फ्री में सैनेटर पैड देना जरूरी है। लड़के-लड़कियों के अलग-अलग वॉशरुम होने चाहिए। जो स्कूल इन आदेशों का पालन नहीं करेंगे उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
3 साल बाद आया फैसला
दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला मेन्स्ट्रुयल हाइजीन पॉलिसी की सुनवाई के दौरान किया है। पिछले 3 सालों से इसकी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि हर स्कूल में दिव्यांगों के अनुकूल टॉयलेट भी बनाए।
2024 में दायर हुई थी जनहित याचिका
इस मामले को लेकर सोशल वर्कर जया ठाकर ने साल 2024 में जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने लड़कियों के स्वास्थ्य सुरक्षा पर चिंता जताई थी। याचिका में कहा था कि पीरियड में होने वाली दिक्कतों के कारण कई लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं, क्योंकि उनके परिवार के पास पैड पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं होते। उन दिनों (मासिक धर्म के दिनों में) कपड़ा यूज करके स्कूल जाना परेशानी का कारण बनता है।