ख़बरिस्तान नेटवर्क : साल 2025 पंजाब के इतिहास में एक ऐसे साल के रूप में दर्ज होने जा रहा है, जिसने प्रदेश को गहरे जख्म दिए। आज इस साल के आखिरी दिन जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह साल प्राकृतिक आपदाओं, सीमा पर तनाव, राजनीतिक उठापटक और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों से भरा नजर आता है। इस पूरे वर्ष में पंजाब ने न केवल आसमान में मंडराते ड्रोनों और मिसाइलों का खौफ देखा, बल्कि अपनों को खोने का वह दर्द भी झेला जिसने समूचे प्रदेश को रुला दिया।
जनवरी से मार्च: राजनीतिक सदमा और पुलिसिया कार्रवाई पर सवाल
साल 2025 की शुरुआत लुधियाना से आई एक बेहद दुखद खबर के साथ हुई। 11 जनवरी को लुधियाना पश्चिमी विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के विधायक गुरप्रीत सिंह गोगी की गोली लगने से मौत हो गई, जिसने पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया।
इसके बाद मार्च का महीना पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लेकर आया। 13-14 मार्च की मध्यरात्रि को पटियाला में कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ और उनके बेटे के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट का मामला सामने आया। इस घटना की गूंज विधानसभा तक पहुंची और अंततः हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच संभालते हुए दिसंबर में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
जून से जुलाई: अपराध का बढ़ता ग्राफ और गैंगस्टरों की चुनौती
जून और जुलाई के महीने पंजाब में कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाते रहे। 9 जून को लुधियाना की मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कंचन कुमारी उर्फ कमल कौर की हत्या कर दी गई, जिसका शव दो दिन बाद बठिंडा में बरामद हुआ।
इसके ठीक बाद 7 जुलाई को फाजिल्का के अबोहर में कपड़ा व्यापारी संजय वर्मा की दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस गैंग ने ली, जिसने व्यापारियों के बीच खौफ पैदा कर दिया। हालांकि, पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में दो आरोपियों को एनकाउंटर में ढेर कर दिया, लेकिन अपराध की इन घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।
अगस्त और सितंबर: इतिहास की सबसे विनाशकारी बाढ़ का मंजर
अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में पंजाब ने कुदरत का वो रौद्र रूप देखा जिसने राज्य की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी। पंजाब के सभी 22 जिलों के करीब 2500 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए, जिसे सरकार ने इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी करार दिया। इस आपदा में 43 लोगों ने अपनी जान गंवाई और करीब 3.87 लाख लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए। खेतों में खड़ी 1.95 लाख हेक्टेयर धान की फसल बर्बाद हो गई और लाखों पशु काल के गाल में समा गए। इस त्रासदी के बीच मुआवजे की राशि को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच जमकर राजनीतिक बयानबाजी भी देखने को मिली।
अक्टूबर: एक फिटनेस आइकन का अंत और भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार
अक्टूबर का महीना पंजाब के लिए दोहरी खबरों वाला रहा। जहाँ एक ओर जालंधर के प्रसिद्ध शाकाहारी बॉडी बिल्डर वरिंदर सिंह घुम्मन की अमृतसर के अस्पताल में इलाज के दौरान दो हार्ट अटैक आने से मौत हो गई।
वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई। सीबीआई ने पंजाब पुलिस के डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को करोड़ों की नकदी, सोना और लग्जरी सामान के साथ गिरफ्तार किया। घुम्मन की मौत ने राज्य के हेल्थ सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े किए, तो डीआईजी की गिरफ्तारी ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया।
नवंबर और दिसंबर: कबड्डी के मैदान पर खून और कला जगत में शोक
साल के अंतिम महीनों में भी हिंसा का दौर जारी रहा। 15 दिसंबर को मोहाली के सोहाना में एक कबड्डी टूर्नामेंट के दौरान अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी राणा बलाचौरिया की हत्या कर दी गई। बंबीहा गैंग ने इसे सिद्धू मूसेवाला की हत्या का बदला बताया।
इसके साथ ही, इस साल पंजाब ने अपने कई अनमोल सितारों को खो दिया। कॉमेडी किंग जसविंदर भल्ला, सिंगर राजवीर जवंदा, संगीत सम्राट चरनजीत आहूजा और साल के अंत में पूरण शाह कोटी जैसे दिग्गजों के निधन से पंजाबी संगीत और कला जगत को कभी न पूरी होने वाली क्षति हुई।
सीमावर्ती तनाव और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का प्रभाव
पूरे साल के दौरान भारत-पाकिस्तान सीमा पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के चलते तनावपूर्ण माहौल रहा। अमृतसर, फिरोजपुर और फाजिल्का जैसे सीमावर्ती जिलों के निवासियों ने कई रातें ब्लैकआउट में और आसमान में मंडराते पाकिस्तानी ड्रोनों के साये में गुजारीं। फिरोजपुर के गांव खाई फेमे में ड्रोन गिरने से एक महिला की जान भी गई।
हालांकि, इस चुनौतीपूर्ण समय में सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों ने सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर हौसला दिखाया, जिसमें नन्हे श्रवण कुमार जैसे बच्चों की बहादुरी ने पूरे देश का दिल जीत लिया।



