भारत के प्रसिद्ध पशु चिकित्सक और पंजाब पशुपालन विभाग के पूर्व डायरेक्टर डॉ. जी. एस. बेदी को केंद्र सरकार ने गोवा के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी पशुपालन से जुड़ी सरकारी योजनाओं की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी है। वे नेशनल लाइवस्टॉक मिशन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट तथा लाइवस्टॉक हेल्थ एंड डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के अंतर्गत आयोजित विभिन्न शिविरों और योजनाओं का गहन निरीक्षण करेंगे।
इस कार्य के लिए केंद्र सरकार ने तीन सदस्यीय टीम गठित की है, जो छत्तीसगढ़ के बालोद, बेमेतरा और दुर्ग जिलों में इन योजनाओं की प्रगति का जायजा लेगी। पंजाब के लिए यह गर्व की बात है कि यहां के मूल निवासी और अनुभवी पशु चिकित्सक डॉ. बेदी को इस अहम जिम्मेदारी के लिए चुना गया है।
डॉ. जी. एस. बेदी का जन्म 11 मई 1967 को पट्टी में स्वर्ण कौर की कोख से हुआ। उनके पिता मंगत सिंह बेदी सेवानिवृत्त हेडमास्टर हैं, जबकि उनकी धर्मपत्नी डॉ. मनप्रीत कौर बॉटनी विषय में पीएचडी हैं। डॉ. MPS Bedi पालतू जानवरों के लिए शीर्ष श्रेणी के उपचार और सर्जरी प्रदान करने के लिए माहिर हैं और डॉ. अमृत प्रीत सिंह बेदी बच्चों के डॉक्टर (पीडियाट्रिशियन) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। इसके साथ ही पूरा परिवार चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
डॉ. बेदी शुरू से ही मेधावी रहे हैं। उन्होंने दसवीं कक्षा में पूरे पंजाब में 14वां स्थान हासिल किया था। उनका नाम एक अनोखे उपचार के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है, जब उन्होंने बिना किसी सर्जरी के 11 घंटे में एक डॉबरमैन मादा से 16 बच्चों का सुरक्षित प्रसव कराया, जो एक भारतीय रिकॉर्ड है। इसके अलावा, इंडियन सोसाइटी फॉर वेटरनरी सर्जरी की ओर से एक विशिष्ट ऑपरेशन के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल से भी सम्मानित किया गया है।समूचे पशु चिकित्सा क्षेत्र के लिए यह गर्व का विषय है कि सरकार ने डॉ. जी. एस. बेदी को इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।



