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पिछले कुछ वर्षों में युवाओं में हार्ट अटैक और अचानक मौत के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है, खासकर कोविड-19 महामारी के बाद। इस बीच सोशल मीडिया और आम चर्चा में कई लोग इसके लिए कोविड-19 और कोविड वैक्सीन को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। लेकिन अब इस धारणा को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की एक नई स्टडी ने पूरी तरह खारिज कर दिया है।

AIIMS की लेटेस्ट रिसर्च के मुताबिक युवाओं में अचानक होने वाली मौतों और कोविड-19 वैक्सीन के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया गया है। स्टडी में साफ कहा गया है कि इन मौतों की मुख्य वजह कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ (CAD) है, न कि कोरोना वैक्सीन।

यह स्टडी Indian Council of Medical Research (ICMR) की जर्नल Indian Journal of Medical Research में 8 दिसंबर 2025 को प्रकाशित हुई है। रिसर्च का शीर्षक है – Burden of sudden death in young adults: A one-year observational study at a tertiary care centre in India।

यह अध्ययन AIIMS, नई दिल्ली के पैथोलॉजी और फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग द्वारा किया गया। मई 2023 से अप्रैल 2024 के बीच फॉरेंसिक मॉर्चुरी में आई अचानक मौतों के मामलों को इसमें शामिल किया गया। हालांकि एक्सीडेंट, ज़हर, नशे की लत, हत्या, आत्महत्या या गंभीर बीमारी से हुई मौतों को स्टडी से बाहर रखा गया।

इस अवधि में कुल 2,214 मौतों के मामले सामने आए, जिनमें से 180 मामले अचानक मौत के थे। इनमें 130 मृतक 18 से 45 वर्ष की उम्र के थे, जबकि 77 लोग 46 से 65 वर्ष की आयु वर्ग में शामिल थे।

कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ के बारे में जानकारी देते हुए दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के कार्डियोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ. अमर सिंघल ने बताया कि यह बीमारी धमनियों में प्लाक जमने से होती है। प्लाक के कारण धमनियां संकरी हो जाती हैं और दिल तक खून का प्रवाह कम हो जाता है। यदि यह प्लाक टूट जाए तो खून का थक्का बन सकता है, जिससे पूरी धमनी ब्लॉक हो सकती है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

डॉ. अमर के अनुसार तंबाकू और सिगरेट का सेवन, ज्यादा तला-भुना भोजन, डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ के बड़े जोखिम कारक हैं।

यह बीमारी धीरे-धीरे वर्षों में विकसित होती है, इसलिए इसके लक्षण भी देर से नजर आते हैं। अगर सीने में दर्द, भारीपन, सांस फूलना, घबराहट या जल्दी थकान जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए, ताकि समय रहते बीमारी का पता लग सके और गंभीर खतरे से बचा जा सके।

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