भारत से पाकिस्तान जाकर मुस्लिम युवक से निकाह करने वाली सरबजीत कौर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग उठी है। इस संबंध में लाहौर की सेशन कोर्ट में सरबजीत कौर और नासिर हुसैन के खिलाफ एक नई याचिका दायर की गई है। यह याचिका 20 जनवरी 2026 को वकील अली चंगेजी संधू कि तरफ से दाखिल की गई।
यह याचिका पाकिस्तान में सिख समुदाय के पूर्व विधायक महिंदर पाल सिंह की ओर से दायर की गई है। याचिका में मांग की गई है कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पाकिस्तान आपराधिक कानून संहिता की धारा 22-A और 22-B के तहत एफआईआर दर्ज की जाए।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरबजीत कौर ने पाकिस्तान के फॉरेनर्स एक्ट 1946 का उल्लंघन किया है। बताया गया है कि उन्होंने सिख तीर्थयात्री वीजा का दुरुपयोग किया और वीजा अवधि समाप्त होने के बावजूद पाकिस्तान में अवैध रूप से ठहराव जारी रखा। रिकॉर्ड के अनुसार, सरबजीत कौर का वीजा 13 नवंबर 2025 को समाप्त हो गया था।
गौरतलब है कि सरबजीत कौर 4 नवंबर 2025 को श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर 1923 श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ अमृतसर से अटारी बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गई थीं, लेकिन इसके बाद वह भारत वापस नहीं लौटीं और पाकिस्तान में ही निकाह कर लिया।
FIR न होने पर कोर्ट का रुख
याचिका में कहा गया है कि दिसंबर 2025 में इस मामले को लेकर फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के डायरेक्टर को भी आवेदन दिया गया था, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसी कारण अब कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
नासिर हुसैन पर भी आरोप
याचिका में नासिर हुसैन पर सरबजीत कौर को अवैध रूप से पनाह देने और अपराध में सहयोगी बनने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि 4 से 5 नवंबर 2025 के बीच सरबजीत कौर गुरुद्वारा ननकाना साहिब से नासिर हुसैन के साथ फरार हो गई थीं, जो पाकिस्तान के कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।
याचिकाकर्ता महिंदर पाल सिंह ने कोर्ट से अपील की है कि तीर्थयात्री वीजा की पवित्रता और नियमों की रक्षा के लिए दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।