अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच एक सप्ताह से जारी युद्ध का असर अब दुनिया के कई देशों पर दिखाई देने लगा है। इसका सबसे बड़ा असर पड़ोसी देश पाकिस्तान में देखने को मिल रहा है, जहां पेट्रोल और डीजल का संकट गहरा गया है। हालात को देखते हुए पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक साथ 55 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च की आधी रात से लागू हो गई हैं।
पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी कतारें
कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर लोगों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। लाहौर, कराची, इस्लामाबाद और रावलपिंडी जैसे बड़े शहरों में लोग देर रात ही तेल भरवाने के लिए पंपों पर पहुंच गए, जिससे कई जगहों पर सैकड़ों मीटर लंबी लाइनें देखने को मिलीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दाम बढ़ाने का ऐलान शुक्रवार देर रात एक आपात प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार, वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब तथा पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने संबोधित किया।
दरअसल, ईरान ने युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को चोक कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई लाइन प्रभावित हुई है। ईरान और ओमान के बीच स्थित इस अहम जलडमरूमध्य से दुनिया की बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। इसी वजह से तेल सप्लाई में बाधा आई और कई देशों में कीमतों पर दबाव बढ़ गया।
कीमतों में बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 321.17 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 335.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है।
रूस ने बढ़ाया मदद का हाथ
इस बीच पाकिस्तान को ऊर्जा संकट से राहत देने के लिए रूस ने मदद का हाथ बढ़ाया है। ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. ममदौह जी सलामेह के मुताबिक, रूस से करीब 7.33 लाख बैरल कच्चे तेल की एक खेप पाकिस्तान पहुंचने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तेल कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से पाकिस्तान के चालू खाते का घाटा लगभग 1.5 से 2 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ सकता है।