भारतीय नागरिक सरबजीत कौर की पाकिस्तान से भारत वापसी का रास्ता फिलहाल साफ होता नजर नहीं आ रहा है। बीते साल नवंबर में सिख श्रद्धालुओं के जत्थे के साथ पाकिस्तान गई सरबजीत की वापसी की उम्मीद तब जगी थी, जब पाकिस्तान की ओर से उन्हें भारत भेजने के संकेत मिले थे, लेकिन बाद में पाक सरकार ने कदम पीछे खींच लिए। इस समय सरबजीत कौर को लाहौर के एक शेल्टर होम में रखा गया है।
ब्लैकमेलिंग के बाद जबरन मुस्लिम बनाकर किया निकाह
इसी बीच सरबजीत के परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि सरबजीत को अगवा किया गया, ब्लैकमेल किया गया और उनकी मर्जी के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन कराकर एक पाकिस्तानी व्यक्ति से शादी करवाई गई।
सरबजीत कौर नवंबर में सिख जत्थे के साथ पाकिस्तान पहुंची थीं, लेकिन वहां पहुंचने के बाद अचानक लापता हो गईं। कुछ दिनों बाद खबर सामने आई कि उन्होंने एक पाकिस्तानी शख्स से निकाह कर लिया है और इस्लाम कबूल कर अपना नाम नूर फातिमा रख लिया है। इस संबंध में उनकी कथित तस्वीरें और वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए थे।
पति करनैल सिंह ने किया खुलासा
भारत में सरबजीत के पति करनैल सिंह ने बताया कि सरबजीत की सोशल मीडिया के जरिए नासिर हुसैन नाम के पाकिस्तानी व्यक्ति से बातचीत होती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हुसैन ने पहले उन्हें बहकाया और फिर आपत्तिजनक वीडियो व तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। करनैल सिंह का दावा है कि इसी दबाव में सरबजीत को पाकिस्तान जाने पर मजबूर किया गया।
पाकिस्तान में आजाद नहीं सरबजीत
करनैल सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि हुसैन ने सरबजीत के परिवार को डराने के लिए लगातार आपत्तिजनक सामग्री भेजी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरबजीत की कुछ ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई हैं, जिनमें वह मदद की गुहार लगाती दिखाई देती हैं और भारत लौटने की इच्छा जताती हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वह पाकिस्तान में आजाद नहीं हैं।
मामले को लेकर इस समय लाहौर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट तीर्थयात्रा वीजा के कथित दुरुपयोग और सरबजीत कौर की शादी की वैधता की जांच कर रहा है। हाईकोर्ट ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय, संघीय जांच एजेंसी और पंजाब पुलिस समेत कई सरकारी संस्थानों से रिपोर्ट तलब की है।
इससे पहले खबर आई थी कि पाकिस्तान सरकार सरबजीत कौर को भारत डिपोर्ट करने की तैयारी कर रही थी। उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया गया था, जिसमें उन्हें फिट पाया गया। उन्हें वाघा बॉर्डर के रास्ते भारतीय अधिकारियों को सौंपा जाना था, लेकिन पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने स्पेशल ट्रैवल परमिट या एनओसी जारी नहीं की, जिससे उनकी वापसी अटक गई।