पंजाब के तरनतारन जिले के प्रसिद्ध पहलवान जस्सा पट्टी ने कुश्ती की दुनिया से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। गांव चुसलेवाड़ निवासी जस्सा पट्टी ने महज 13 साल की उम्र में अपने पिता और गुरु पहलवान सलविंदर सिंह शिंदा के मार्गदर्शन में मिट्टी के अखाड़े में कदम रखा था। 16 सालकी आयु तक वे कुश्ती में पूरी तरह निपुण हो चुके थे।
अपने लंबे करियर के दौरान जस्सा पट्टी को कई गंभीर शारीरिक चोटों का सामना करना पड़ा। कई बार डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया, लेकिन पिता के आशीर्वाद और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्हें आगे बढ़ाने के लिए उनके पिता ने कई बार कर्ज लेकर भी हर संभव सहयोग किया।
नामी पहलवानों को दी कड़ी चुनौती
जस्सा पट्टी ने देशभर के अखाड़ों में नामी पहलवानों को चुनौती दी और अपने शानदार प्रदर्शन से पहचान बनाई। उन्होंने कई बार हिंद केसरी और भारत केसरी जैसे प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम किए।
जस्सा पट्टी का विवाह गांव टोला नंगल निवासी मंदीप कौर से हुआ है, जो खुद पांच बार एशिया वर्ल्ड कप खेल चुकी हैं और एशिया गोमा टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं। यह जोड़ी हमेशा कुश्ती के खेल के प्रति पूरी तरह समर्पित रही है। उनके परिवार में एक बेटी सदा कौर और चार महीने का बेटा निधान सिंह है।
अखाड़े को कहा अलविदा
जस्सा पट्टी ने बताया कि उन्होंने परिवार और करीबी दोस्तों से विचार-विमर्श के बाद स्वेच्छा से कुश्ती के अखाड़े को अलविदा कहने का फैसला लिया है।
पिता भी रहे दिग्गज पहलवान
जस्सा पट्टी के पिता सलविंदर सिंह शिंदा चुसलेवाड़ वर्ष 1971 में सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने 19 बार इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ऑल इंडिया गेम्स में हिस्सा लिया और सात बार पंजाब केसरी व रुस्तम-ए-हिंद जैसे खिताब जीतकर कुश्ती जगत में खास पहचान बनाई।