पंजाब में गठबंधन की अटकलों के बीच शिरोमणि अकाली दल ने बड़ा सियासी दांव खेला है। अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल ने धूरी पहुंचकर पूर्व विधायक अरविंद खन्ना को पार्टी में शामिल कर लिया। खन्ना इससे पहले भारतीय जनता पार्टी में पंजाब के उपप्रधान पद पर थे, जिससे भाजपा को सियासी झटका लगा है।
खास बात यह रही कि सुखबीर बादल खुद धूरी पहुंचे और खन्ना को अकाली दल में शामिल कराया। अरविंद खन्ना पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते रहे हैं। वे क्षेत्र में एक बड़े उद्योगपति के रूप में भी पहचान रखते हैं और उम्मीद फाउंडेशन के माध्यम से संगरूर हलके में लंबे समय तक सामाजिक सेवा करते रहे हैं।
राजनीतिक सफर की बात करें तो अरविंद खन्ना ने वर्ष 2002 में कांग्रेस के टिकट पर संगरूर विधानसभा से चुनाव जीतकर विधायक बने थे। 2004 के लोकसभा चुनाव में वे कांग्रेस उम्मीदवार रहे, लेकिन सुखदेव सिंह ढींडसा से हार गए। साल 2012 में उन्होंने धूरी विधानसभा हलके से चुनाव लड़ा और एकतरफा जीत दर्ज कर खुद को मजबूत नेता साबित किया। हालांकि उस समय कांग्रेस की सरकार नहीं बनने पर उन्होंने दो साल बाद विधायक पद से इस्तीफा देकर सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी।
वहीं इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता विनीत जोशी ने कहा कि अरविंद खन्ना को शुभकामनाएं हैं। पार्टी में आना-जाना उनका निजी फैसला है और उनके जाने से भाजपा को कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। भाजपा कैडर आधारित पार्टी है और 2027 के चुनावों की तैयारी में जुटी हुई है।



