मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण भारत में कुकिंग गैस (LPG) की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। गैस की कमी को देखते हुए मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फिलहाल कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। इससे कई जगह होटल और रेस्टोरेंट कारोबारियों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
सरकार ने लागू किया कंट्रोल ऑडर
सरकार ने गैस सप्लाई को नियंत्रित करने के लिए एसेंशियल कमोडिटी एक्ट, 1955 के तहत कंट्रोल ऑर्डर लागू किया है। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट से आने वाले LPG शिपमेंट में देरी हो रही है, जिससे घरेलू बाजार में गैस की किल्लत बढ़ गई है।
गैस सप्लाई को चार कैटेगरी में बांटा गया
नई व्यवस्था के तहत गैस सप्लाई को चार कैटेगरी में बांटा गया है। घरेलू PNG और वाहनों की CNG को पूरी सप्लाई दी जाएगी। खाद बनाने वाली फैक्ट्रियों को कम से कम 70% गैस मिलेगी, जबकि बड़े उद्योगों और छोटे बिजनेस, होटल-रेस्टोरेंट को उनकी जरूरत के हिसाब से लगभग 80% गैस दी जाएगी।
कई राज्यों में हालात गंभीर हो गए हैं। महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे और नागपुर में कॉमर्शियल गैस की भारी कटौती की गई है। पंजाब में 8 मार्च से 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडरों की डिस्पैच रोक दी गई है। वहीं हैदराबाद सहित कई शहरों में कॉमर्शियल सिलेंडर बुकिंग फ्रीज कर दी गई है।
संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तेल कंपनियों के अधिकारियों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो गैस सप्लाई की स्थिति की समीक्षा करेगी। सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए गैस डिलीवरी में OTP और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी अनिवार्य कर दिया है।
दो वजहों से पैदा हुआ संकट
विशेषज्ञों के मुताबिक यह संकट मुख्य रूप से दो वजहों से पैदा हुआ है – पहला, ईरान जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस सप्लाई लगभग रुक गई है, और दूसरा, कतर के LNG प्लांट पर हमले के बाद उत्पादन में कमी आ गई है। भारत अपनी लगभग 40% LNG कतर से आयात करता है।
हालांकि सरकार का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। वैकल्पिक सप्लाई के लिए अमेरिका समेत अन्य देशों से गैस मंगाने पर विचार किया जा रहा है और रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।