महाराष्ट्र के डिप्टी मुख्यमंत्री और NCP नेता अजीत पवार का चार्टर्ड विमान बारामती के पास लैंडिंग की कोशिश के दौरान क्रैश हो गया। यह हादसा सुबह के लगभग 8:45 बजे रनवे से पहले हुआ। विमान मुंबई से बारामती जा रहा था जहाँ पवार की जिला परिषद चुनाव से जुड़े चार सभाए आयोजित होनी थीं।
हादसे में अजीत पवार समेत कम से कम 5–6 लोगों की मौत हुई है। इस संख्या में पर्सनल असिस्टेंट, उनके सुरक्षाकर्मी और विमान स्टाफ शामिल हैं। दुर्घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुँचकर राहत कार्य जारी रखे हुए हैं। विमान क्रैश के कारण इलाके में आग लगने और मलबे के फैलने की तस्वीरें सामने आई हैं। अधिकृत पुष्टि और दुर्घटना के कारणों की जांच अभी जारी है।
अजीत अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ था। वे राष्ट्रीय राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते थे — उनके चाचा शरद पवार महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति के दिग्गज नेता रहे हैं।
पवार ने प्रारंभिक राजनीति की शुरुआत सहकारी समितियों, मिल्क यूनियनों, शुगर फैक्ट्रियों और बैंकों से की। 1991 में उन्होंने बारामती लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर सांसद के तौर पर राजनीति में कदम रखा, हालांकि बाद में यह सीट उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के लिए छोड़ दी।
इसके बाद उन्होंने 1995 में बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक के रूप में लगातार कई बार जीत दर्ज की। वे महाराष्ट्र सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों जैसे वित्त और योजना, जल संसाधन, ऊर्जा, ग्रामीण विकास आदि की जिम्मेदारियाँ संभाल चुके हैं।
राजनीति में उनके करियर का एक विशेष भाग उपमुख्यमंत्री पद रहा है। पवार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री कई बार बने — वे राज्य के सबसे अधिक समय तक इस पद पर रहने वाले नेताओं में से एक थे।
राजनीतिक जीवन में उन्होंने नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा उपनेता, और मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में बारामती विधानसभा सीट पर पार्टी का दबदबा बना रहा है और उन्होंने राज्य की राजनीति में लंबा प्रभाव छोड़ा।
हालांकि वे राजनीति में कई बड़े पदों पर रहे, उनके कार्यकाल के दौरान कुछ विवाद भी आए, जिनमें प्रशासन और परियोजनाओं के सम्बन्ध में आलोचनाएँ भी शामिल रहीं।
राजनीति के अतिरिक्त, पवार बारामती और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों व स्थानीय समाज के मुद्दों पर भी सक्रिय रहे, और विकास तथा सहकारिता के कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया।
उनका राजनीतिक सफ़र लगभग तीन दशकों से अधिक चला, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र के प्रशासन, वित्त, योजना और नीति-निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।