पंजाब पुलिस ने पटियाला के सनौर से आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा की सरकारी कोठी खाली करवा ली है। यह कोठी उन्हें विधायक होने के नाते अलॉट की गई थी। पठानमाजरा को रेप केस में पटियाला की अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की।
जानकारी के मुताबिक, इससे पहले प्रशासन ने कोठी खाली कराने के लिए नोटिस भी चिपकाया था, लेकिन इसके बावजूद विधायक ने मकान खाली नहीं किया। आखिरकार बुधवार को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कोठी को खाली कराया गया।
कोठी खाली होने की जानकारी मिलते ही हरमीत सिंह पठानमाजरा सोशल मीडिया पर लाइव आए। उन्होंने कहा कि यह घर उन्हें विधायक के तौर पर मिला है और वह अभी भी पंजाब विधानसभा के सदस्य हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोठी खाली करानी ही है तो पहले AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल से कपूरथला हाउस खाली करवाया जाए।
सूत्रों के अनुसार, विधायक इस समय ऑस्ट्रेलिया में मौजूद बताए जा रहे हैं, हालांकि पुलिस या किसी जांच एजेंसी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
परिवार का आरोप – तानाशाही रवैया अपनाया गया
कोठी के बाहर मौजूद विधायक के रिश्तेदार संदीप सिंह राजा ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जरूरत से ज्यादा पुलिस बल तैनात किया है और परिवार के किसी सदस्य को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही। उन्होंने कहा कि विधायक की पत्नी की तबीयत पहले से ही खराब है और अगर उनकी सेहत को कोई नुकसान होता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
राजा ने यह भी आरोप लगाया कि एक निर्वाचित विधायक के परिवार के साथ इस तरह की सख्ती प्रशासन की तानाशाही मानसिकता को दर्शाती है। उन्होंने दावा किया कि यह पूरी कार्रवाई सनौर हलके के इंचार्ज रणजोत सिंह हडाना के दबाव में की गई है।
पठानमाजरा से जुड़ा विवाद क्या है?
हरमीत सिंह पठानमाजरा के खिलाफ 3 सितंबर 2025 को पटियाला के सिविल लाइन थाने में धोखाधड़ी और दुष्कर्म के आरोपों में FIR दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि विधायक ने सरकारी नौकरी और योजनाओं का लालच देकर लाखों रुपये वसूले और खुद को तलाकशुदा बताकर शादी की। बाद में चुनावी हलफनामे में पहली पत्नी का नाम सामने आने पर सच्चाई उजागर हुई।
पुलिस जब उन्हें गिरफ्तार करने हरियाणा के करनाल पहुंची तो वहां हंगामा हुआ। पुलिस के अनुसार, समर्थकों ने फायरिंग और पथराव किया, जिसके बाद विधायक मौके से फरार हो गए। इस दौरान एक पुलिसकर्मी घायल हुआ और एक समर्थक को हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया।विधायक ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा था कि दिल्ली नेतृत्व के खिलाफ बोलने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।फिलहाल, कोठी खाली कराने की कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया है।