शहीद-ए-आजम Bhagat Singh की शहादत दिवस पर पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन द्वारा पूरे राज्य में डिपो के बाहर गेट रैलियां आयोजित की गईं। इन रैलियों के माध्यम से कर्मचारियों ने शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की और साथ ही अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।
यूनियन के प्रदेश चेयरमैन बलविंदर सिंह राठ ने कहा कि भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए मात्र 23 वर्ष की उम्र में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनकी कुर्बानी आज भी देशवासियों को संघर्ष और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि आज भी कर्मचारी उन्हीं के बताए रास्ते पर चलते हुए अपने हकों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

रैली के दौरान नेताओं ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि सरकार कर्मचारियों की आवाज दबाने के लिए उन पर झूठे केस दर्ज करवा रही है और उन्हें जेल भेजा जा रहा है। साथ ही विभागों के निजीकरण के जरिए सरकारी संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है।
किलोमीटर स्कीम का किया विरोध
कर्मचारियों ने किलोमीटर स्कीम के तहत निजी बसों को शामिल करने का भी विरोध किया। उनका कहना है कि यह योजना विभाग के लिए घाटे का सौदा है और इससे करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है। बावजूद इसके सरकार इस योजना को जबरन लागू कर रही है।
ठेकेदारी सिस्टम को लेकर भी नाराजगी जताई
यूनियन नेताओं ने ठेकेदारी सिस्टम को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि ठेकेदारों के जरिए कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। कर्मचारियों के EPF और ESI समय पर जमा नहीं किए जा रहे और वेतन में भी कटौती की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सत्ता में आने से पहले ठेकेदारी खत्म करने का वादा किया था, लेकिन अब तक एक भी कर्मचारी को पक्का नहीं किया गया।
सबसे बड़ा मुद्दा वेतन का रहा। यूनियन ने बताया कि पीआरटीसी में कार्यरत कर्मचारियों को अभी तक वेतन जारी नहीं किया गया है, जिससे उनके परिवारों पर आर्थिक संकट गहरा गया है। कर्मचारियों का कहना है कि कम वेतन में काम करने के बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा, जिससे उनके घरों के चूल्हे ठंडे पड़ रहे हैं।
प्रधान सतपाल सिंह ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री और मंत्री विधानसभा सत्र के दौरान बार-बार कहते हैं कि आउटसोर्स ठेकेदारों (Outsource Contractors) के जरिए कर्मचारियों का शोषण हो रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि ये ठेकेदार पिछली सरकारों के नेताओं के करीबी और रिश्तेदार हैं। इनके कारण पनबस और पीआरटीसी को हर साल करीब 28 करोड़ रुपए का नुकसान जीएसटी और कमीशन के रूप में हो रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार कर्मचारियों के EPF और ESI समय पर जमा नहीं करते और उनकी तनख्वाह में भी गैर-कानूनी कटौतियां करते हैं, जिससे कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने ठेकेदारों के जरिए लूट के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पनबस में अब तक चार ठेकेदार बदले जा चुके हैं, लेकिन हर ठेकेदार ने कर्मचारियों का शोषण ही किया है और करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने चुनाव के समय ठेकेदारी सिस्टम खत्म कर कर्मचारियों को पक्का करने का वादा किया था, लेकिन अब तक एक भी कर्मचारी को पक्का नहीं किया गया।
वहीं, मीटिंग में मौजूद उपप्रधान जसवंत सिंह, कैशियर जसवीर सिंह और मलकीत सिंह ने कहा कि 23 मार्च तक भी पीआरटीसी कर्मचारियों की तनख्वाह उनके खातों में नहीं आई है। कम वेतन पर काम करने वाले कर्मचारियों के घरों की स्थिति खराब हो रही है, लेकिन सरकार और मैनेजमेंट को इसकी कोई चिंता नहीं है।
25 मार्च को धरने का ऐलान !
यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कर्मचारियों की तनख्वाह जारी नहीं की गई, तो 25 मार्च को पीआरटीसी हेड ऑफिस के बाहर बड़ा धरना दिया जाएगा और इसके बाद आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस मौके पर जालंधर- 1 डिपू के प्रधान बिक्रमजीत सिंह समेत कई यूनियन नेता और कर्मचारी मौजूद रहे।