चंडीगढ़ में नई आबकारी नीति के तहत शराब कारोबार में बड़ा बदलाव किया गया है। मोनोपॉली खत्म करने के उद्देश्य से प्रशासन ने अब पेट्रोल पंपों और मॉल्स में भी शराब बिक्री की अनुमति देने का फैसला लिया है। इसके साथ ही शराब दुकानों पर डिजिटल भुगतान को अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ेंगी।
नई नीति के अनुसार, बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर जरूरी लाइसेंस लेकर विदेशी शराब, वाइन और बीयर की बिक्री कर सकेंगे। एल-2डी लाइसेंस श्रेणी के तहत अब स्वीकृत बाजारों, मॉल्स और पेट्रोल पंपों पर स्थित कम से कम 300 वर्ग फुट क्षेत्र वाले स्टोर आयातित वाइन और बीयर की खुदरा बिक्री कर पाएंगे।
डिप्टी कमिश्नर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि पेट्रोल पंपों पर शराब बिक्री पर कोई अलग से प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। हालांकि, इसके लिए स्टोर का बड़ा होना और सालाना 3 करोड़ रुपये का जीएसटी रिटर्न दाखिल करना जरूरी होगा। इन शर्तों को पूरा करने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।
अल्कोमीटर लगाना भी अनिवार्य
इसके अलावा बार, होटल और रेस्टोरेंट में अल्कोमीटर लगाना भी अनिवार्य किया गया है, ताकि ग्राहक अपने अल्कोहल स्तर की जांच खुद कर सकें और जिम्मेदारी से शराब का सेवन कर सकें।
आबकारी विभाग को इस नीति से अच्छा राजस्व मिल रहा है। शराब ठेकों की दूसरी चरण की ई-नीलामी में 11 ठेकों से 62.38 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। वहीं दोनों चरणों में अब तक 93 ठेकों से 550 करोड़ रुपये से अधिक की आय हो चुकी है, जो तय रिजर्व प्राइस से करीब 28% ज्यादा है। पहले चरण में 82 ठेकों से 487.68 करोड़ रुपये और दूसरे चरण में 62.38 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। साथ ही 4.28 करोड़ रुपये भागीदारी शुल्क के रूप में भी प्राप्त हुए हैं।
GPS ट्रैकिंग को भी लागू किया जा रहा
आबकारी विभाग ने शेष 4 लाइसेंसिंग यूनिट्स के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस बार राजस्व लक्ष्य को बड़े अंतर से पार किया जाएगा। सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने के लिए GPS ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को भी लागू किया जा रहा है।