ईरान-इजराइल जंग के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती कर दी है, ताकि आम लोगों पर बढ़ते ईंधन कीमतों का बोझ न पड़े। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपए कर दी गई है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी गई है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। दरअसल, तेल की बढ़ती कीमतों के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा था। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, कंपनियां पेट्रोल पर करीब 24 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर तक का घाटा झेल रही हैं। ऐसे में कीमतें बढ़ाने की नौबत आ सकती थी, जिससे आम जनता प्रभावित होती। इसे रोकने के लिए सरकार ने टैक्स घटाने का फैसला लिया।
एक्साइज ड्यूटी एक तरह का इनडायरेक्ट टैक्स होता है, जिसे केंद्र सरकार प्रोडक्शन या मैन्युफैक्चरिंग पर लगाती है। इसके अलावा राज्य सरकारें वैट (VAT) भी वसूलती हैं, जिससे ईंधन की कीमतें और बढ़ जाती हैं। इस बीच, निजी कंपनी नायरा एनर्जी ने हाल ही में पेट्रोल 5 रुपए और डीजल 3 रुपए प्रति लीटर महंगा कर दिया था, जिससे कई शहरों में कीमतें और बढ़ गई थीं।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 27 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें ईरान जंग के चलते बने हालात पर चर्चा होने की संभावना है।सरकार ने देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी की खबरों को भी खारिज किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि भारत के पास करीब 60 दिनों का पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।