ख़बरिस्तान नेटवर्क : यूपी के आगरा में 140 रुपये के गबन के एक पुराने मामले में कोर्ट ने 33 साल बाद फैसला सुनाते हुए सिपाही को बरी कर दिया। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अचल प्रताप सिंह की अदालत ने सबूतों की कमी के चलते आरोपी को दोषमुक्त करार दिया।
क्या था पूरा मामला
मामला साल 1991-92 का है। आरोप था कि जीआरपी में तैनात सिपाही राम अवतार ने एस्कॉर्ट ड्यूटी के नाम पर गलत तरीके से भत्ता (Allowance) ले लिया था। FIR के मुताबिक सिपाही ने दावा किया था कि वह 1 सितंबर से 8 सितंबर 1991 तक झांसी पैसेंजर ट्रेन में आगरा कैंट से धौलपुर तक 7 दिन ड्यूटी पर गया था। इसके बदले उसने 140 रुपये का भत्ता लिया।
जांच में क्या सामने आया
जांच के दौरान पता चला कि सिपाही सिर्फ 3 दिन ही ड्यूटी पर गया था, जबकि उसने 7 दिन का भत्ता क्लेम किया। इसे सरकारी पैसे के गबन (Misappropriation) के तौर पर देखा गया और केस दर्ज किया गया। मामले में पुलिस अधिकारियों की गवाही तो हुई, लेकिन कई अहम गवाह सवाल-जवाब के लिए कोर्ट में पेश नहीं हुए।
इससे केस कमजोर हो गया। साथ ही जिस जनरल डायरी (GD) के आधार पर आरोप साबित होना था, वह भी कोर्ट में पेश नहीं की जा सकी। पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि नियमों के मुताबिक GD रिकॉर्ड 5 साल बाद नष्ट कर दिया जाता है। ऐसे में जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हो पाए। इसी कारण अदालत ने माना कि आरोपी के खिलाफ ठोस सबूत नहीं हैं और उसे बरी कर दिया गया।