ख़बरिस्तान नेटवर्क : जालंधर में आम आदमी पार्टी (AAP) की अहम बैठक के दौरान सियासी माहौल गर्माता नजर आया। प्रदेश प्रभारी मनीष सिसोदिया की तरफ से शाहपुर सिटी कैंपस में बुलाई गई इस बैठक में 25 से अधिक विधायक, मंत्री और पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए।
7 सांसदों का सवाल सोचने वाला -स्पीकर संधवा
पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवा ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह गंभीर सोच का विषय है कि “2 विधायकों की पार्टी से 7 राज्यसभा सदस्य कैसे बन सकते हैं।” उन्होंने ‘गद्दार’ शब्द पर सीधे प्रतिक्रिया देने से बचते हुए कहा कि इस मुद्दे पर विस्तार से विचार करने की जरूरत है और जो नेता गए हैं, उन्हें खुद सोचना चाहिए कि उनका फैसला सही था या नहीं।
सेलिब्रिटी लाइफ’ के लिए दिया धोखा- जीवनजोत
विधायक जीवनजोत ने बताया कि पार्टी की मीटिंग लगातार होती रहती है। ऐसे में मीटिंग में मुद्दों को लेकर अक्सर बात होती है। वहीं राघव चड्ढा ने कहा था कि ऐसी कोई करंसी नहीं बनी है जो उन्हें खरीद सके, इस पर विधायक ने कहाकि वह खुद के एथिक्सि से समझौता करके चले गए है। ऐसे में साफ पता चलता है कि वह काफी समय से भाजपा के साथ थे और वह कम्फर्ट और सेलीब्रिटी वाली जिंदगी जीना चाहते थे। ऐसे में जेल जाने की जब बात आती है तो हमारे लीडर जेलों में जाते है।
बलकार सिद्धू बोले- 2 साल के मेहमान
विधायक बलकार सिंह सिद्धू ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कई पार्टियों को खत्म कर चुकी है। बिना नाम लिए उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को ‘2 साल के मेहमान’ बताया और कहा कि उनका इस्तेमाल कर बाद में उन्हें छोड़ दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम चुनावों को लेकर यह बैठक अहम है।
मंत्री बरिंदर गोयल ने बैठक को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताते हुए कहा कि पार्टी ब्लॉक स्तर से लेकर मुख्यमंत्री तक एकजुट है। उन्होंने कहा कि पार्टी छोड़कर जाने वालों से संगठन पर कोई असर नहीं पड़ेगा और AAP एक मजबूत संगठन है।
विपक्ष पर निशाना, दावों को बताया बेबुनियाद
AAP नेताओं ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि 50 विधायकों के पार्टी छोड़ने जैसी बातें पूरी तरह बेबुनियाद हैं। साथ ही यह भी दावा किया कि पंजाब में AAP सरकार अपने वादों को पूरा कर रही है और 2027 में जनता फिर से पार्टी को मौका देगी। बैठक के दौरान राघव चड्ढा को लेकर भी बयान सामने आए। नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता किया और व्यक्तिगत कारणों से पार्टी छोड़ी। उनका कहना था कि AAP के नेता संघर्ष से पीछे नहीं हटते।