Jalandhar के पंजाब प्रेस क्लब में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंजाबी पाठ्य पुस्तकों को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कुछ किताबों में एस.सी./एस.टी. समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिससे समाज की भावनाएं आहत हो रही हैं।
बताया गया कि अमरदीप प्रकाशन/पेसमेकर पब्लिकेशन, जालंधर-दिल्ली द्वारा प्रकाशित ये किताबें प्री-नर्सरी से लेकर कक्षा 8 तक के छात्रों के लिए हैं और कई स्कूलों, खासकर डी.ए.वी. संस्थानों में पढ़ाई जा रही हैं। भूपिंदर कौर और डॉ. अमरजीत कौर द्वारा लिखित ‘नवि नुहार’, ‘नवि नुहार डी.ए.वी.’, ‘निकुंज’ और ‘निर्मोलक’ जैसी किताबों में कथित तौर पर विशेष वर्गों के खिलाफ अपमानजनक सामग्री होने का आरोप लगाया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा गया कि एक ही सामग्री को अलग-अलग नामों से प्रकाशित किया गया है। साथ ही कई किताबों में प्रकाशक की पूरी जानकारी नहीं दी गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। वक्ताओं ने इसे शिक्षा प्रणाली के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया।
उन्होंने CBSE के 12 अगस्त 2024 के सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी पाठ्य पुस्तक में ऐसी सामग्री नहीं होनी चाहिए, जिससे किसी भी वर्ग या समुदाय की भावनाएं आहत हों। इसके बावजूद इन किताबों का इस्तेमाल जारी रहना नियमों की अनदेखी दर्शाता है।
कार्रवाई की मांग तेज
इस मामले में अमरदीप प्रकाशन/पेसमेकर पब्लिकेशन, उनके मालिकों, लेखकों और DAV College Managing Committee, नई दिल्ली समेत अन्य संस्थाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई है। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि इन किताबों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए, उन्हें वापस मंगवाया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रेम पाल डुमेली, अतुल चड्डा, महेश दत्त, कश्मीरी लाल, प्रदीप, अशोक सहित कई लोग मौजूद रहे।