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जालंधर: पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी (PRTC) कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन (ब्रांच जालंधर-1) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नाम एक विस्तृत मांग पत्र जारी कर चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तुरंत गौर नहीं किया गया, तो 25, 26 और 27 मई को पूरे पंजाब में सरकारी बसों का पूर्ण चक्का जाम किया जाएगा। इसके साथ ही, कर्मचारी संगरूर में मुख्यमंत्री आवास का घेराव और पक्का मोर्चा शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।

कर्मचारी नेताओं में (रोडवेज डिपो-1 यूनियन के प्रधान विक्रमजीत सिंह, सुखविंदर सिंह और अन्यों) के हस्ताक्षरों वाले इस मांग पत्र में सरकार की नीतियों पर तीखा रोष व्यक्त किया गया है।

कर्मचारियों की मुख्य 9 मांगें:

कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना: विभाग में ‘स्पेशल कैडर पॉलिसी’ बनाकर शोषण करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के फैसलों के अनुसार सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को तुरंत रेगुलर (पक्का) किया जाए।

ठेकेदारी प्रथा (आउटसोर्सिंग) का खात्मा: ठेकेदारों के माध्यम से की जा रही भर्ती को पूरी तरह बंद कर विभाग के तहत सीधी पक्की भर्ती की जाए।

समान काम, समान वेतन: ‘समान काम समान वेतन’ के नियम को सख्ती से लागू किया जाए।

फर्जी मुकदमे वापस हों: संगरूर जेल में बंद कर्मचारियों को तुरंत रिहा किया जाए और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज धारा 307 (हत्या का प्रयास) समेत सभी झूठे पुलिस केस रद्द किए जाएं।

किलोमीटर स्कीम बंद हो: सरकारी बेड़े में प्राइवेट बसों को शामिल करने की ‘किलोमीटर स्कीम’ को तुरंत बंद किया जाए, क्योंकि यह विभाग के निजीकरण की साजिश है।

सरकारी बसों की संख्या बढ़ाना: सरकारी बेड़े में कम से कम 10,000 नई सरकारी बसें शामिल की जाएं ताकि युवाओं को रोजगार मिले और सरकारी परिवहन व्यवस्था मजबूत हो।

कंडीशन लागू करने पर रोक: 18 जुलाई 2014 की कंडीशन को रद्द कर बाहर किए गए कर्मचारियों को बहाल किया जाए और नाजायज शर्तें थोपना बंद हो।

प्राइवेट ड्राइवरों पर लगाम: टाइम टेबल को केवल सरकारी बसों के हित में बनाया जाए और प्राइवेट बस मालिकों के पक्ष में टाइम टेबल में की जा रही गड़बड़ी रोकी जाए।

पेंशन और फंड का भुगतान: सेवानिवृत्त कर्मचारियों के करीब 12-1300 करोड़ रुपये के बकाया फंड और पेंशन का सरकार तुरंत भुगतान करे।

“सरकार ने किया वादाखिलाफी, आंदोलन ही एकमात्र रास्ता”

यूनियन नेताओं ने कहा कि वे पिछले लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे हैं, लेकिन सरकार लगातार उनकी अनदेखी कर रही है। किलोमीटर स्कीम के नाम पर विभाग का निजीकरण किया जा रहा है और हक मांगने वाले कर्मचारियों को जेलों में ठंसा जा रहा है।

यूनियन ने साफ किया है कि यदि 25 मई से पहले सरकार ने इस पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया, तो राज्यव्यापी हड़ताल से जनता को होने वाली परेशानी की पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार की होगी।

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