सोशल मीडिया पर चर्चा में रही ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का एक्स (X) अकाउंट भारत में बैन कर दिया गया है। एक्स की ओर से बताया गया कि यह कार्रवाई स्थानीय नियमों, कोर्ट के आदेश या कानूनी शिकायत के आधार पर की गई है।
पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अकाउंट बैन की पुष्टि करते हुए स्क्रीनशॉट साझा किया। उन्होंने कहा कि “जैसा सोचा था, वैसा ही हुआ।”
इंस्टाग्राम पर तेज़ी से बढ़े फॉलोअर्स
जानकारी के मुताबिक, CJP के इंस्टाग्राम फॉलोअर्स मात्र 6 दिनों में तेजी से बढ़कर 1.26 करोड़ तक पहुंच गए हैं। यह संख्या राजनीतिक दलों के फॉलोअर्स से भी अधिक बताई जा रही है । भाजपा के 87 लाख और कांग्रेस के 1.33 करोड़ फॉलोअर्स के मुकाबले यह आंकड़ा काफी करीब और चर्चा में रहा।
वहीं, X पर बैन से पहले पार्टी के करीब 1.93 लाख फॉलोअर्स थे। फिलहाल फेसबुक पर इस नाम से कोई आधिकारिक अकाउंट मौजूद नहीं है।
क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’?
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक व्यंग्यात्मक (satirical) ऑनलाइन मूवमेंट के रूप में सामने आई है, जिसका नारा है“सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी”
पार्टी का दावा किया गया उद्देश्य सोशल मीडिया पर राजनीतिक व्यंग्य और युवाओं की भागीदारी को बढ़ाना बताया गया है।
सदस्यता की शर्तें
CJP की सदस्यता के लिए चार “योग्यताएं” बताई गई हैं:
बेरोजगारी
आलसी होना
ऑनलाइन रहने की आदत
सोशल मीडिया पर अपनी राय रखने की क्षमता
मैनिफेस्टो में क्या है?
पार्टी के कथित मैनिफेस्टो में कई विवादित और व्यंग्यात्मक प्रस्ताव शामिल हैं, जैसे
रिटायरमेंट के बाद CJI को राज्यसभा में जाने पर रोक
वोट डिलीट करने पर चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव
महिला आरक्षण 50% करने की बात
बड़े मीडिया घरानों की जांच और लाइसेंसिंग पर सवाल
दलबदल करने वाले नेताओं पर लंबे समय तक चुनाव लड़ने की पाबंदी
कैसे शुरू हुआ यह आंदोलन?
फाउंडर अभिजीत दीपके, जो बॉस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन की पढ़ाई कर रहे हैं और पहले एक राजनीतिक सोशल मीडिया टीम से जुड़े रह चुके हैं, ने बताया कि यह विचार सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाओं से प्रेरित होकर आया।
उनके अनुसार, एक कथित बयान पर शुरू हुई ऑनलाइन बहस ने इस डिजिटल मूवमेंट को जन्म दिया।
ज़मीनी गतिविधियां भी दिखीं
दिल्ली में कुछ लोग कॉकरोच की पोशाक पहनकर यमुना किनारे सफाई अभियान में भी शामिल हुए। समर्थकों का कहना है कि यह पहल फिलहाल चुनावी राजनीति से ज्यादा युवाओं में जागरूकता फैलाने पर केंद्रित है।
बयान पर बाद में सफाई
इस पूरे विवाद से जुड़े बयान पर बाद में संबंधित पक्ष की ओर से स्पष्टीकरण भी दिया गया, जिसमें कहा गया कि टिप्पणी का आशय गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था और यह विशेष संदर्भ में दी गई थी।