न्यूजीलैंड में नगर कीर्तन रोके जाने के बाद अब ऑस्ट्रेलिया में भारतीयों, खासकर पंजाबी सिखों के खिलाफ बयानबाजी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया के कट्टरपंथी नेता Thomas Sewell ने भारतीयों को देश छोड़ने की धमकी देते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया “केवल गोरों का देश” है और वह इसे भारत या सूडान जैसा नहीं बनने देगा।
सेवेल ने 23 फरवरी को दिए बयान में भारतीयों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में भारतीयों, विशेष रूप से पंजाबियों को वीजा और पीआर दिए जाने से ऑस्ट्रेलिया की पहचान खत्म हो रही है। उसने दावा किया कि देश में पंजाबी 10वीं सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है, जो उसके अनुसार “खतरे” का संकेत है।
हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने सेवेल के बयान को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने देश में रह रहे 2 लाख से अधिक पंजाबी सिखों और करीब 10 लाख भारतीयों को सुरक्षा का भरोसा दिया है। गृह मंत्री Tony Burke ने साफ कहा कि नफरत फैलाने वालों पर नए हेट स्पीच कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि ऑस्ट्रेलिया की पहचान उसकी विविधता (डायवर्सिटी) है और नस्लवाद के लिए यहां कोई जगह नहीं है।
सरकार ने यह भी कहा कि थॉमस सेवेल ऑस्ट्रेलिया में नस्लवाद और कट्टरपंथ का चेहरा है। मेलबर्न कोर्ट के बाहर उसने भारतीयों को पीआर देने का विरोध किया और करीब 10 लाख भारतीयों को वापस भेजने की मांग की। सेवेल का कहना है कि वह “व्हाइट रिप्लेसमेंट” के नाम पर गोरों को दोबारा बसाने की मुहिम चला रहा है।
गौरतलब है कि सेवेल से जुड़े कट्टरपंथी संगठन National Socialist Network पर ऑस्ट्रेलियाई सरकार पहले ही प्रतिबंध लगा चुकी है। इसके बावजूद सेवेल लगातार नस्लीय और भड़काऊ बयान देता रहा है। यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ऑस्ट्रेलिया सरकार देश में नफरत फैलाने के खिलाफ नए और कड़े कानून लागू कर रही है।