ख़बरिस्तान नेटवर्क : जालंधर के रतन अस्पताल में एक बुजुर्ग महिला मरीज को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा किया और इलाज के तरीके पर सवाल उठाए।
आयुष्मान कार्ड का जिक्र, फिर बिगड़ी हालत?
परिवार का दावा है कि उनकी माता गुरदेव कौर कुछ समय पहले तक सामान्य हालत में थीं और खाना भी मांग रही थीं। उनका आरोप है कि जैसे ही उन्होंने Ayushman Bharat Yojana के तहत इलाज कराने की बात की, महज 10-15 मिनट के भीतर मरीज को वेंटिलेटर पर शिफ्ट कर दिया गया। परिजनों का कहना है कि अस्पताल ने पैसे लेने के दबाव में मरीज की हालत को जानबूझकर गंभीर दिखाया।
‘लगातार पैसों की मांग’ का आरोप
मरीज के बेटे हरकेश कुमार और अन्य रिश्तेदारों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन लगातार पैसों की मांग कर रहा था। परिवार का कहना है कि जब सरकार मुफ्त इलाज की सुविधा दे रही है, तो अस्पताल उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान कर रहा है।
अस्पताल ने आरोपों को बताया निराधार
वहीं, अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी नरिंदर कुमार ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मरीज की हालत पहले से ही बेहद नाजुक थी और उन्हें पहले कई अस्पतालों से रेफर किया जा चुका था। अस्पताल के मुताबिक मरीज की NT-proBNP रिपोर्ट में लेवल 35,000 पाया गया, जो सामान्य से कई गुना अधिक है। प्रशासन का कहना है कि 72 वर्षीय गुरदेव कौर को कार्डियक अरेस्ट हुआ, जो उनकी गंभीर हालत के चलते स्वाभाविक था।
विवाद के बीच उठे कई सवाल
मामले में परिजनों और अस्पताल के दावों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। एक ओर परिवार इलाज में लापरवाही और पैसों की मांग का आरोप लगा रहा है, वहीं अस्पताल इसे मरीज की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति बता रहा है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठने लगी है।