पाकिस्तान ने गुरुवार रात अफगानिस्तान के कई इलाकों में हवाई हमले किए। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक काबुल में घरों पर हुई बमबारी में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 15 लोग घायल हो गए। मरने और घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हमलों में कई मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।
तालिबान बोला- इसका जवाब देंगे
तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि हमला प्राइवेट एयरलाइन ‘काम एयर’ के फ्यूल डिपो पर किया गया, जहां से सिविलियन और संयुक्त राष्ट्र (UN) के विमानों को ईंधन सप्लाई किया जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा।
वहीं पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पाकिस्तानी तालिबान (TTP) के ठिकानों को निशाना बनाकर की गई है। पाकिस्तान का दावा है कि हाल के महीनों में देश में बढ़ते आतंकी हमलों के बाद यह ऑपरेशन शुरू किया गया है।
तालिबान के मुताबिक पाकिस्तान ने कंधार और पक्तिका प्रांतों में भी हवाई हमले किए। कंधार को तालिबान नेताओं का गढ़ माना जाता है। हालांकि तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अफगानिस्तान की जमीन किसी भी देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दी जाएगी।
दरअसल पाकिस्तान लंबे समय से तालिबान सरकार पर दबाव बना रहा है कि वह अपनी जमीन से आतंकी संगठनों की गतिविधियां रोकें। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से संचालित हो रहा है, जबकि तालिबान इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव 22 फरवरी से बढ़ गया है। पाकिस्तान ने सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी, जिसमें उसके मुताबिक 70 से ज्यादा TTP लड़ाके मारे गए थे। इसके जवाब में 27 फरवरी को अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान पर हमला किया था।
सैन्य कार्रवाई को ‘गजब लिल हक’ नाम दिया पाकिस्तान ने
पाकिस्तान ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘गजब लिल हक’ नाम दिया है। पाकिस्तानी सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के मुताबिक इस ऑपरेशन में अब तक 415 तालिबान लड़ाके मारे गए, 580 से ज्यादा घायल हुए और 182 सैन्य पोस्ट तबाह की गईं।
हालांकि तालिबान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उसके केवल 8 से 13 लड़ाके मारे गए हैं। तालिबान का दावा है कि इस संघर्ष में 55 पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए हैं।संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 26 फरवरी से 5 मार्च के बीच पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में 56 नागरिकों की मौत हुई है, जिनमें 24 बच्चे शामिल हैं। इन हमलों के कारण करीब 1.15 लाख लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हो गए हैं।