ख़बरिस्तान नेटवर्क : अमेरिका की की कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के H-1B वीजा पर लगाई गई एक लॉख डॉलर की फीस लेने वाली पॉलिसी को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह फीस नहीं बल्कि एक टैक्स है और इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति की नहीं बल्कि संसद की मंजूरी चाहिए।
पिछले साल ट्रंप ने किया था ऐलान
आपको बता दें कि पिछले साल सितंबर के महीने में डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि जो कंपनियां H-1B वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देंगी। उन्हें वीजा के लिए 1 लाख डॉलर एक्स्ट्रा फीस देनी होगी। इसके बाद ही 20 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने इसे चुनौती थी।
भारतीयों के लिए सबसे बड़ी राहत
H-1B एक गैर-अप्रवासी वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां कुछ समय के लिए विदेशों से हाई स्किल वाले पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। पहले H-1B वीजा आवेदन करने पर कंपनियों को करीब 2000 से 5000 डॉलर तक फीस देनी पड़ती थी। इस वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय IT और टेक प्रोफेशनल्स करते हैं। ऐसे में कोर्ट के इस फैसले को भारतीयों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।