अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। गुरुवार तड़के अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमले किए। अप्रैल में हुए संघर्ष विराम के बाद लगातार दूसरे दिन हुई इस कार्रवाई ने पूरे पश्चिम एशिया में चिंता बढ़ा दी है।
ईरानी मीडिया के अनुसार केश्म द्वीप, बंदर अब्बास, मीनाब और सीरिक सहित कई क्षेत्रों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान परमाणु समझौते पर बातचीत में देरी कर रहा है, इसलिए उस पर दबाव बनाए रखना आवश्यक है। ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने 49 टॉमहॉक मिसाइलें दागीं और लड़ाकू विमानों से भी हमले किए।
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन और अन्य क्षेत्रों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ईरान ने यह भी कहा कि उसने क्षेत्र में मौजूद 18 अमेरिकी ठिकानों पर कार्रवाई की है।
इस बीच ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को जहाजों के लिए बंद करने का दावा किया है। हालांकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को खारिज किया है। होर्मुज को लेकर बढ़ी अनिश्चितता का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखाई दिया और कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।
तनाव के बीच जॉर्डन ने दावा किया कि उसने ईरान की ओर से दागी गई पांच मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं ईरान ने अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है, जिसकी पुष्टि अमेरिका ने नहीं की है।
क्षेत्रीय हालात को देखते हुए रूस ने अमेरिका और ईरान दोनों से सैन्य कार्रवाई रोककर कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की है। वहीं कतर ने तनाव कम करने के प्रयासों के तहत अपना प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव António Guterres ने भी बढ़ते संघर्ष पर चिंता जताते हुए चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया गहरे संकट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और युद्ध की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की।
लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब अमेरिका-ईरान टकराव के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।