भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है। इसकी बड़ी वजह यह है कि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए अमेरिका की ओर से अस्थायी छूट मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिन का स्पेशल लाइसेंस जारी किया है, जो 3 अप्रैल तक वैलिड रहेगा।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत यह अस्थायी फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण साझेदार है और ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए यह छूट दी गई है।
इस लाइसेंस के तहत भारत केवल वही रूसी कच्चा तेल खरीद सकेगा जो 5 मार्च तक जहाजों में लोड हो चुका है। फिलहाल करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल टैंकरों में भरकर एशियाई समुद्री क्षेत्रों के आसपास वेटिंग मोड में मौजूद है, जिसे भारत रिसीव कर सकता है।
इसी बीच मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ब्लॉक होने से ब्रेंट क्रूड की कीमत 84 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का उपभोक्ता है और अपनी लगभग 88 प्रतिशत जरूरत विदेशों से आयात करता है। रूस से रियायती दरों पर मिलने वाला कच्चा तेल भारत के लिए अहम माना जाता है, क्योंकि इससे देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखने और महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलती है।
पेट्रोल – डीजल की कीमतों में फिलहाल बढ़ोतरी नहीं होगी
सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिकी छूट मिलने से उम्मीद जताई जा रही है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल बढ़ोतरी नहीं होगी।