खबरिस्तान नेटवर्क: क्या आप भी यूपीआई पर जाकर बार-बार बैलेंस चेक करते हैं। अगर करते हैं तो थोड़ा सावधान हो जाएं क्योंकि अब 1 अगस्त 2025 से इसमें बदलाव होने वाला है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया 1 अगस्त 2025 से यूपीआई में एपीआई (API) के नए नियम लागू करने वाला है। इसका असर बैलेंस चेक, ऑटोपे और ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक जैसी सर्विसेज पर होगा।
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— UPI (@UPI_NPCI) May 26, 2025
लिमिट होगी तय
नए नियमों के अंतर्गत बैंकों और पैमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को 31 जुलाई 2025 तक यूपीआई नेटवर्क पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली 10 एपीआई पर लिमिट तय करने के लिए कहा गया है। इसके बाद बैलेंस चेक जैसी सर्विसेस की लिमिट को दिन के हिसाब से तय किया जाएगा।
ऑटोपे पेमेंट्स भी होगी मैनुअल
ऑटोपे मैनडेट्स की लिमिट और प्रोसेस में कोई भी बदलाव नहीं आएगा। माने आप कितनी भी सर्विसेस को ऐसा करने के लिए अकाउंट का एक्सेस दे सकते हैं लेकिन इसके पेमेंट में अब बदलाव होगा। अब पीक ऑवर्स यानी सुबह 10 से लेकर दोपहर 1 और शाम 5 से लेकर 09:30 के बीच में आपके अकाउंट में से पैसे नहीं कटेंगे। ये पेमेंट्स सिर्फ नॉन-पीक ऑवर्स में ही प्रोसेस होगी जिसे ऑटोपे शैड्यूल में देरी हो सकती है।
लेनदेन स्टेटस चेक
यूपीआई से लेनदेन करते समय पेमेंट का अटक जाना कोई नई बात नहीं है। पहले भी ऐसा होने पर बार-बार स्टेटस चेक करने की एपीआई कॉल्स बंद हो जाएंगी। यूजर्स को तुरंत पता नहीं चलेगा कि पेमेंट सक्सेस हुआ भी है या नहीं।
बैलेंस चेक पर भी लगेगा अब बैलेंस
1 अगस्त 2025 से यूजर्स अब दिन में किसी एक यूपीआई ऐप से सिर्फ 50 बार ही बैलेंस चेक कर पाएंगे। जो लोग दो ऐप इस्तेमाल करते हैं तो दोनों में अलग-अलग 50 बार ऐसा कर सकते हैं। इससे ज्यादा बार आपको यदि बैलेंस की जानकारी चाहिए तो फिल आपको अपने बैंक ऐप का रुख करना पड़ेगा।
लिंक अकाउंट पर भी लगेगी लिमिट
यूपीआई ऐप पर आप अपने मोबाइल नंबर से कितने भी अकाउंट लिंक कर सकते हैं लेकिन इनको चेक करने की लिमिट दिन में अब 25 हो जाएगी। ये रिक्वेस्ट भी तभी काम करेगी जब यूजर बैंक चुन लेगा और उसकी सहमति होगी।
1 अगस्त से लागू हो जाएंगे नए नियम
आपको बता दें कि यह सारे नियम 1 अगस्त से लागू हो जाएंगे। एनपीसाआई ने बैंकों और PSPs को ऑर्डर भी दिया है कि वो अपने ऐप्स की एपीआई ( API Application Programming Interface) को नई प्रोसेस के अनुसार अपग्रेड करें। पढ़ने में भले ही ये थोड़ा टेक टाइप का मामला लगे लेकिन एपीआई ही हर ऐप की बैक बोन होती है। डिब्बे के अंदर डिब्बे वाला मामला हर ऐप की जरुरत के अनुसार से इसमें बदलाव कर सकता है।
इस वजह से बदले नियम
ऐसे में अब यहां सवाल यह आ रहा है कि इन बदलावों से यूजर पर क्या असर पड़ेगा तो आपको बता दें कि आपको परेशान होने की जरुरत नहीं है क्योंकि अब हर लेनदेन का मैसेज आपको आपके बैंक से ही आएगा। यूपीआई ने यह फैसला नेटवर्क पर दबाव कम करने के लिए लिया है। हर बैलेंस चेक एक लेनदेन है जो बैक एंड पर पूरी प्रोसेस का हिस्सा होता है। इसका असर सिस्टम पर पड़ता है इसकी लिमिट तय होने पर सिस्टम मक्खन की तरह काम करेगा। ऐसी उम्मीद है।