खबरिस्तान नेटवर्क: भारत का संविधान लिखने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर की आज जयंती मनाई जा रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ट्वीट कर संविधान के निर्माता की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस साल सारा देश उनकी 135वीं जयंती मना रहा है। देश का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था।
सीएम मान ने किया ट्वीट
मुख्यमंत्री सीएम मान ने ट्वीट करते हुए लिखा कि – ‘भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। बाबासाहेब एक सच्चे नेता, इतिहासकार और दूरदर्शी विचारक था। हमारी सरकार समानता के उनके सपनों को पूरा करने और हर बच्चे को अच्छी शिक्षा देने का प्रयास कर रही है’।
ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੇ ਨਿਰਮਾਤਾ, ਭਾਰਤ ਰਤਨ ਬਾਬਾ ਸਾਹਿਬ ਡਾ. ਭੀਮ ਰਾਓ ਅੰਬੇਡਕਰ ਜੀ ਨੂੰ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਜਨਮ ਦਿਹਾੜੇ ਮੌਕੇ ਸਿਰ ਝੁਕਾ ਕੇ ਪ੍ਰਣਾਮ। ਬਾਬਾ ਸਾਹਿਬ ਅਸਲ ਮਾਅਨਿਆਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਨੇਤਾ, ਇਤਿਹਾਸਕਾਰ, ਦੂਰਦਰਸ਼ੀ ਸੋਚ ਦੇ ਮਾਲਕ ਸਨ। ਸਾਡੀ ਸਰਕਾਰ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਬਰਾਬਰਤਾ ਅਤੇ ਹਰ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਚੰਗੀ ਸਿੱਖਿਆ ਦੇਣ ਦੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ ਯਤਨਸ਼ੀਲ… pic.twitter.com/FoHfLEfvUL
— Bhagwant Mann (@BhagwantMann) April 14, 2025
संविधान के रचियता थे बाबा साहेब
डॉ. भीम राव अंबेडकर को भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता के तौर पर जाना जाता है। वह स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री भी थे। डॉ. भीम राव अंबेडकर का जन्मदिन हर साल 14 अप्रैल को पूरे देश में मनाया जाता है। डॉ. भीम राव अंबेडकर को बाबा साहेब भी कहते हैं। वो एक प्रमुख विद्वान, वकील, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिज्ञ थे जिन्होंने अपना जीवन सामाजिक न्याय और समानता के लिए समर्पित कर दिया। उनका जन्मदिन सामाजिक सद्भाव और एकता के लिए एकजुट होने के तौर पर मनाया जाता है।
14 अप्रैल को हुआ था जन्म
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के एक महार परिवार में हुआ था। उस समय भारत में जाति व्यवस्था बहुत कठोर थी और उन्हें बचपन से ही भेदभाव का सामना करना पड़ा था। हालांकि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में बहुत मेहनत की और विदेश में भी पढ़ाई की। उन्होंने शिक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन भी किया और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक में से कानून की पढ़ाई करने के बाद वह भारत वापिस आए और उन्होंने वकालत शुरु की। उन्होंने दलित समाज के उत्थान के लिए अथक प्रयास किए। जाति व्यवस्था के खिलाफ भी आवाज उठाई और अपना पूरा जीवन शिक्षा और रोजगार के अवसरों में समानता के लिए समर्पित कर दिया। डॉ. अंबेडकर ने अछूतों के उत्थान के लिए कई आंदोलनों का नेतृत्व भी किया। उन्होंने भारतीय संविधान में आरक्षण प्रणाली को शामिल करने में खास भूमिका निभाई। वह संविधान में मौलिक अधिकारों और संघीय ढांचे के प्रबल समर्थक थे।