पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कथित वायरल वीडियो को लेकर जारी विवाद में नया मोड़ आ गया है। मामले में दावा किया जा रहा है कि गुरुग्राम के एक फाइव स्टार होटल में हुई गुप्त बैठक के दौरान वीडियो को डीपफेक साबित करने के लिए रिपोर्ट तैयार करवाने की कोशिश की गई। इस संबंध में कथित CCTV फुटेज और WhatsApp चैट्स भी सामने आई हैं। हालांकि, इन दस्तावेजों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता और फोरेंसिक दस्तावेज विशेषज्ञ जसप्रीत सिंह ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारियों ने उनसे संपर्क कर मुख्यमंत्री से जुड़े वायरल वीडियो पर रिपोर्ट तैयार करवाने की बात कही थी। उनका दावा है कि गुरुग्राम स्थित होटल क्राउन प्लाजा में हुई बैठक के दौरान रिपोर्ट को मुख्यमंत्री के पक्ष में तैयार करने पर चर्चा हुई और इसके लिए आर्थिक पेशकश भी की गई।
सामने आई कथित WhatsApp चैट्स में रिपोर्ट के कुछ हिस्सों में बदलाव, तकनीकी टिप्पणियों को संशोधित करने और निष्कर्ष को मजबूत बनाने जैसी बातें लिखी होने का दावा किया जा रहा है। वहीं, CCTV फुटेज में कुछ लोगों की बैठक दिखाई देने का दावा किया गया है, जिन्हें इस मामले से जोड़कर देखा जा रहा है।
जसप्रीत सिंह का कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जिन निजी साइबर विशेषज्ञों से राय ली जा रही है, वे सरकारी मान्यता प्राप्त फोरेंसिक लैब नहीं हैं। उनका आरोप है कि बाद में इन रिपोर्टों का सार्वजनिक और राजनीतिक इस्तेमाल किया गया, जबकि उन्हें ऐसा न करने का भरोसा दिया गया था।
उधर, गुरुग्राम पुलिस इस मामले में दो युवकों के खिलाफ FIR दर्ज कर चुकी है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है।गौरतलब है कि यह विवाद अक्टूबर 2025 में सामने आए एक वायरल वीडियो से जुड़ा है, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान जैसा दिखने वाला व्यक्ति नजर आने का दावा किया गया था। वीडियो की सत्यता को लेकर अलग-अलग फोरेंसिक रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान लगातार यह कहते रहे हैं कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति वह नहीं हैं, जबकि इस मुद्दे पर राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर भी बहस जारी है।