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खबरिस्तान। जालंधर के धोगड़ी रोड़ पर मैक च्वाइस टूल की फैक्टरी में  हृदयविदारक हादसा हो गया। इस भीषण दुर्घटना में तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि नौ अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में एक महिला भी शामिल है, जिसकी पहचान सिम्मी के रूप में हुई है। घटना औद्योगिक सुरक्षा मानकों और कार्यस्थल पर श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, हादसा उस वक्त हुआ जब फैक्टरी के अंदर कंटेनर या भारी रैक अचानक गिर गए। चीख-पुकार और अफरा-तफरी के माहौल में तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मृतकों और घायलों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

बच्चों से जुल्म हुआ

मृतकों में शामिल सिम्मी की कहानी बेहद मार्मिक और दुखद है। बताया जा रहा है कि सिम्मी को मैक च्वाइस टूल फैक्टरी में काम करते हुए अभी मुश्किल से 10 दिन ही हुए थे। उसके परिवार ने बताया कि सिम्मी पहले से ही विधवा थी और अपने दो छोटे बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए उसने यह नौकरी शुरू की थी। इस हादसे ने उसके बच्चों को पूरी तरह अनाथ कर दिया है और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अस्पताल में सिम्मी के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। 

हादसे में घायल हुए नौ लोगों को तुरंत स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, इनमें से दो लोगों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। अन्य घायलों को भी गंभीर चोटें आई हैं, जिनमें फ्रैक्चर और अंदरूनी चोटें शामिल हैं। अस्पताल के गलियारों में घायलों के परिजनों की भीड़ लगी हुई थी। 

कई सवाल खड़े कर गया हादसा

यह हादसा न केवल एक मानवीय त्रासदी है, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा मानकों के घोर उल्लंघन का भी एक स्पष्ट उदाहरण है। फैक्टरी में भारी वस्तुओं को संभालने और स्टोर करने के लिए उचित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया, यह एक बड़ा सवाल है। क्या श्रमिकों को उचित प्रशिक्षण दिया गया था? क्या मशीनरी और रैक की नियमित जांच होती थी? क्या ओवरलोडिंग की समस्या थी? इन सभी बिंदुओं पर गहन जांच की आवश्यकता है। अक्सर देखा जाता है कि लाभ कमाने की होड़ में फैक्टरी मालिक श्रमिकों की सुरक्षा को ताक पर रख देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऐसी भयावह दुर्घटनाएं होती हैं।

स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। न केवल घटना की निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई भी की जानी चाहिए। मृतक के परिवारों को पर्याप्त मुआवजा और घायलों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके साथ ही, जिले की सभी औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। यह सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किसी भी कार्यस्थल पर श्रमिक सुरक्षित महसूस करें और उनकी जान जोखिम में न डाली जाए।

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