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ख़बरिस्तान नेटवर्क : पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान की फौज के काले मंसूबे एक फिर जगजाहिर हो गए हैं। पाकिस्तान का अगर किसी ने बेड़ा गर्क किया है तो सिर्फ पाकिस्तानी जनरल रहे हैं। करप्ट, अय्याश और बेहद खराब सोच वाले सैन्य अफसरों के कई किस्से मशहूर हैं। आज पढ़िए पाकिस्तान में क्यों फौज के बिना किसी भी सरकार की गाड़ी नहीं चलती। 

“फौजी हाउसिंग स्कीम्स” और ज़मीनों की बंदरबांट

रिटायर्ड जनरल्स और अधिकारियों को लाहौर, कराची, रावलपिंडी में करोड़ों की ज़मीनें मुफ्त में या बेहद सस्ते दाम पर दी जाती हैं। इसें कोई दखल नहीं देता। लाहौर का DHA (Defence Housing Authority) इलाका फौज के अधीन है और वहां फौजी अफसरों के आलीशान बंगले हैं। ये ज़मीनें अक्सर आम किसानों या नागरिकों से ली जाती हैं, जिस पर कई केस भी हुए हैं। न कोई अपील न दलील।

फौज के “बिजनेस एंपायर”

पाकिस्तानी फौज केवल रक्षा तक सीमित नहीं है – वह एक बड़े व्यापारिक साम्राज्य (military empire) की मालिक है, जिसे कई लोग “Military Inc.” भी कहते हैं। सेना के कई प्रत्यक्ष और परोक्ष व्यापार हैं, जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में हजारों करोड़ रुपये का हिस्सा रखते हैं। फौज पाकिस्तान में अपने बिजनेस चलाती है। Fauji Foundation, Army Welfare Trust (AWT), Shaheen Foundation, और Bahria Town जैसे संस्थानों में सेना की बड़ी हिस्सेदारी है। इनकी मिल्कियत में बैंक, होटल, सीमेंट कंपनियां, दूध कंपनियां (Yes! Millac, Fauji Foods), और मीडिया चैनल तक आते हैं।

अय्याश अफसर, मूक सरकार

उच्च अधिकारी विदेश दौरों में महंगी शॉपिंग, लक्ज़री होटलों में रहना, विदेशी महिलाओं से संपर्क जैसे कई किस्सों में घिरे हैं। कुछ अफसर रक्षा बजट का निजी इस्तेमाल करते हुए पकड़े भी गए – लेकिन जांच कम ही होती है। 2010 के आसपास एक रिपोर्ट लीक हुई जिसमें कहा गया कि कुछ हाई-प्रोफाइल रिटायर्ड जनरल्स को राजनीतिक लॉबिंग के बदले विदेशी मेहमानों के साथ ‘एंटरटेनमेंट’ की पेशकश की जाती थी। 

इस पर पाकिस्तानी पत्रकार Nusrat Javed और Najam Sethi ने टिप्पणी की थी, लेकिन बाद में उन्हें धमकियां दी गईं। अकलीम अख्तर, जिन्हें “जनरल रानी” के नाम से जाना जाता है, पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य शासक जनरल याह्या खान की करीबी थीं। उनका प्रभाव इतना था कि उन्हें उस समय पाकिस्तान की सबसे शक्तिशाली महिला माना जाता था।

मीडिया सेंसरशिप के बावजूद लीक वीडियो

सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए जिसमें जनरल की बेटियों के शाही लाइफस्टाइल, गाड़ियों के काफिले, और प्राइवेट पार्टियों की झलक मिलती है। “Military Inc.” – Ayesha Siddiqa द्वारा लिखित, जिसमें बताया गया है कि पाकिस्तानी सेना कैसे देश की अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण रखती है। Dawn और The Friday Times जैसी पाक मीडिया ने भी इस पर रिपोर्टें की हैं, हालांकि सेना द्वारा सेंसरशिप भारी रहती है। पाकिस्तानी सेना की आलोचना वहां “देशद्रोह” जैसा माना जाता है और पत्रकारों को जेल या गायब तक कर दिया गया है।

पाकिस्तान की सेना की कुछ सबसे बड़ी ऐतिहासिक और रणनीतिक गलतियां ऐसी रही हैं जिनका असर केवल पाकिस्तान ही नहीं, पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ा है। 

1947-48 में कश्मीर में कबायलियों की घुसपैठ

पाक सेना ने कश्मीर में कबायली घुसपैठ कराई ताकि उसे जबरन कब्जाया जा सके। योजना अनियोजित थी और कबायली लूटमार में लग गए। महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी और कश्मीर भारत में शामिल हो गया। कश्मीर विवाद की नींव इसी घटना से पड़ी।

1971: बांग्लादेश का बनना

पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में सेना ने बंगालियों पर अत्याचार शुरू कर दिया – ऑपरेशन सर्चलाइट के तहत लाखों मारे गए। सेना ने राजनीतिक समाधान की बजाय बल प्रयोग किया, जिससे भारत को हस्तक्षेप करना पड़ा। नतीजा पाकिस्तान का विभाजन हुआ, बांग्लादेश बना, और 90,000 पाक सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया – इतिहास का सबसे बड़ा सैन्य समर्पण।

कारगिल युद्ध (1999) में धोखे से घुसपैठ

जनरल परवेज मुशर्रफ ने भारत के कारगिल सेक्टर में घुसपैठ कराई जबकि दोनों देशों के बीच शांति वार्ता चल रही थी। प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ को इस ऑपरेशन की पूरी जानकारी नहीं दी गई। पाकिस्तान की सेना को भारतीय सेना ने पीछे खदेड़ा और बड़ी गिनती में पाकिस्तानी मार गिराए। तब अमेरिका ने भी पाकिस्तान का साथ नहीं दिया।

आतंकवाद को रणनीतिक हथियार बनाया

पाकिस्तान की ISI ने अफगानिस्तान, भारत और खुद पाकिस्तान में आतंकी समूहों को पनाह दी – जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हक्कानी नेटवर्क। अब यह रणनीति उलटी पड़ी – आज खुद पाकिस्तान आतंकवाद से ग्रस्त है। मगर इसके बावजूद वो दूसरे देशों में खूनी खेल खेलने से बाज नहीं आता। जैसा की ताजा घटना पहलगाम में हुई है। आर्थिक तबाही, वैश्विक अलगाव, FATF की निगरानी, और दुनिया में ‘टेरर स्टेट’ की छवि बन गई है। लोगों के पास खाने को आटा नहीं और सेना युद्ध लड़ना चाहती है।

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