पंजाब के अमृतसर नॉर्थ से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक और पूर्व IPS अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचकर बेअदबी से जुड़े कानूनों को लेकर अपने लिखित विचार और सुझाव सिंह साहिब (जत्थेदार) को सौंप दिए हैं। श्री अकाल तख्त साहिब परिसर के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए कुंवर विजय प्रताप ने बताया कि उन्हें अकाल तख्त साहिब की ओर से एक पत्र मिला था।
इस पत्र में बेअदबी के मामलों के संबंध में बनाए गए कानून को लेकर उनसे लिखित रूप में सुझाव और जानकारी मांगी गई थी, जिसके जवाब में उन्होंने अपना पक्ष रख दिया है। विस्तार से पक्ष रखने के लिए ‘निजी सुनवाई’ की मांगपूर्व आईजीपी ने लिखित सुझाव देने के साथ-साथ अकाल तख्त साहिब से निजी तौर पर पेश होकर अपना पक्ष रखने (Personal Hearing) का मौका देने की भी अपील की है।
उन्होंने कहा:”हमने संक्षेप में तो अपने विचार लिखित रूप में दे दिए हैं, लेकिन अगर हमें निजी सुनवाई का मौका मिलता है, तो हम विस्तारपूर्वक हर बात को सामने रख सकते हैं। साल 2015 में पंजाब में जो बेअदबी की घटनाएं और कोटकपूरा व बहबल कलां गोलीकांड हुए थे, उन सभी मामलों की पूरी तफ्तीश मेरे ही नेतृत्व में की गई थी।
“चंडीगढ़ में रिपोर्ट का खारिज होना, कानून की हत्या जैसा”कुंवर विजय प्रताप ने तफ्तीश रिपोर्ट को रद्द किए जाने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मामले की फाइल फरीदकोट की माननीय सेशंस अदालत में लंबित थी, तब उसे बिना पूरी तरह देखे चंडीगढ़ में ही खारिज (Quash) कर दिया गया, जो एक तरह से कानून और संविधान की हत्या जैसा था।
उन्होंने अकाल तख्त साहिब से मांग की है कि इस बात की भी गहन जांच होनी चाहिए कि किन परिस्थितियों और किन कारणों के चलते उस चालान या जांच रिपोर्ट को खारिज किया गया था। विधायक ने आगे बताया कि सिंह साहब की ओर से उन्हें पूरा भरोसा दिलाया गया है कि उन्हें अपना पक्ष विस्तार से रखने के लिए जल्द ही समय (समन) दिया जाएगा।इस विषय पर अधिक जानकारी और कुंवर विजय प्रताप सिंह के विधानसभा में दिए गए वक्तव्य को समझने के लिए आप कुंवर विजय प्रताप सिंह द्वारा बेअदबी मामले पर उठाया गया मुद्दा देख सकते हैं, जो इस पूरे घटनाक्रम और उनकी जांच की पृष्ठभूमि को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है।