इस बार 2022 विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस पंजाब में कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। पार्टी हाईकमान ने न तो प्रदेश अध्यक्ष बदला और न ही किसी एक चेहरे पर पूरा दांव लगाया। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा गया है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का चेयरमैन बनाया गया है।
कांग्रेस ने इस बार जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए नई चुनावी टीम तैयार की है। करीब 31% दलित वोट बैंक को साधने के लिए चन्नी को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा डॉ. अमर सिंह को घोषणापत्र समिति का चेयरमैन, सुखविंदर सिंह डैनी और राजकुमार वेरका को वर्किंग प्रेसिडेंट बनाया गया है।
जट्ट सिख वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष, प्रताप सिंह बाजवा को नेता प्रतिपक्ष और सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी का चेयरमैन बनाया गया है। वहीं कई अन्य जट्ट सिख नेताओं को अलग-अलग समितियों में अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
शहरी हिंदू वोट बैंक को साधने के लिए विजय इंदर सिंगला को चुनाव प्रबंधन समिति का चेयरमैन बनाया गया है। ओपी सोनी और भारत भूषण आशु को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिली हैं। वहीं ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय को प्रतिनिधित्व देने के लिए संगत सिंह गिलजियां और रजिया सुल्ताना को भी प्रमुख भूमिकाएं दी गई हैं।

क्षेत्रीय समीकरणों में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा महत्व मालवा को दिया है, जहां 69 विधानसभा सीटें हैं। माझा में संगठन और रणनीति पर जोर दिया गया है, जबकि दोआबा में दलित, ओबीसी और संगठनात्मक संतुलन को प्राथमिकता दी गई है।
कांग्रेस का मानना है कि इस नई रणनीति के जरिए पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव में गुटबाजी से बचते हुए सभी वर्गों और क्षेत्रों को साथ लेकर 117 सीटों की चुनावी लड़ाई मजबूती से लड़ सकेगी।